प्रदेश सरकार की अनुबंध नीति पर बिफरे कर्मचारी, उठाई ये मांग
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प्रदेश सरकार की अनुबंध नीति के खिलाफ कर्मचारियों के विरोध के स्वर उठने लगे है। अनुबंध कर्मचारी इस नीति के खिलाफ है। प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया और पूर्व महासचिव राजेश वर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार की दोहरी और भेदभावपूर्ण नीतियों की वजह से अनुबंध से नियमित हुए कर्मचारियों में रोष है।
सरकार की अनुबंध नीति को सभी विभाग और सरकार अपनी मर्जी से लागू कर रहे हैं। वर्मा ने बताया कि इसी नीति का एक ताजा उदाहरण स्वास्थ्य विभाग में देखने को मिला है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अनुबंध रेडियोलोजिस्ट और लैब असिस्टेंट को कुछ माह पूर्व 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर नियमित किया गया था लेकिन बीते 29 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग ने अपने 5 वर्ष बाद नियमितीकरण के आदेश वापस ले लिए।
इन कर्मियों के 3 वर्ष बाद नियमितीकरण के आदेश जारी कर इन्हें बैकडेट से साल 2015 तक तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर नियमित कर दिया। न ही इन पर 31 मार्च की शर्त लगी न ही 30 सितंबर की।
जबकि 2015 में तो नियमितीकरण के लिए 3 वर्ष की नीति थी ही नहीं। प्रदेश में 20 हजार से अधिक अनुबंध कर्मी हैं जो 8 से 5 वर्ष तक का कार्यकाल पूरा करके नियमित हुए हैं।
संघ का मानना है कि जिन अनुबंध कर्मियों को पिछली भाजपा सरकार ने नियुक्त किया उनको वर्तमान सरकार ने 8 से लेकर 6 वर्ष बाद का कार्यकाल पूरा करने के बाद नियमित किया। जबकि अपने कार्यकाल में नियुक्त कर्मियों को इसी सरकार ने 3 वर्ष की नीति बना कर नियमित किया है।
उसी दल को समर्थन जो वरिष्ठता लाभ देगा
पदाधिकारियों का कहना है कि अब अनुबंध कर्मी केवल उसी दल को समर्थन देंगे जो पार्टी अनुबंध कर्मियों को प्रथम नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता लाभ देने के साथ-साथ प्रोबेशन पीरियड को खत्म कर अनुबंध से नियमित हुए कर्मचारियों को इनीशियल वेतन देगी।
अनुबंध कर्मी उसी पार्टी का समर्थन करेंगे जो पिछले सभी अनुबंध कर्मियों को तीन वर्ष की नियमितीकरण नीति का एक समान लाभ देंगे। यदि सरकार ने सभी को 3 वर्ष का लाभ नहीं दिया तो वह इस चुनाव में कांग्रेस की खिलाफत करेंगे।
डीएलएड के विरोध में सीएंडवी शिक्षक
उधर राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने कहा कि डीएलएड ऐसे शिक्षकों के लिए हैं जिन्होंने चयन (नियुक्ति) से पूर्व किसी प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त नही किया है, लेकिन शिक्षा विभाग के आदेशानुसार जो 2001 से 2017 के बीच नियुक्त हुए हैं, उन्हें भी डीएलएड करनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या 2001 से 2017 के बीच जो नियुक्तियां हुई हैं वो असंवैधानिक हैं या भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को दरकिनार करते हुए की गई। उन्होेंने कहा कि इस बारे में सरकार का स्पष्टीकरण आने के बाद ही सीएंडवी अध्यापक डीएलएड करेंगे। ऐसा नहीं होता है तो कोई भी सीएंडवी शिक्षक डीएलएड नहीं करेगा।