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नेताओं ने रची करोड़ों की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश, ये विवादित अफसर दे रहा साथ

Sat, 21 Dec 2019 11:07 AM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 21 Dec 2019 11:07 AM IST
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conspired to grab government land in Dharamshala in Himachal Pradesh
- फोटो : अमर उजाला

धर्मशाला के दाड़ी में करीब 5 कनाल करोड़ों की सरकारी जमीन पक्ष और विपक्ष के कुछ नेताओं को भा गई है। राजस्व नियम तोड़कर इसे हड़पने की साजिश रची जा रही है। इसमें साथ न देने वाले कांगड़ा जिले के अफसरों को बाईपास कर जमीन के केस को शिमला से अप्रूव करने की तैयारी कर ली गई है। सूत्रों के अनुसार केस को शिमला से अप्रूव करने के लिए मामले में एक तथाकथित विवादित अफसर सियासी चाल का मोहरा बनकर कूद गए हैं।

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कुछ वर्ष पहले अवैध वसूली मामले में यह अफसर गिरफ्तार भी हुए थे। एक याचिका का हवाला देते हुए इस अफसर के कार्यालय ने जिला प्रशासन को नोटिस भेजकर जमीन केस में जवाब मांगा है। साथ ही शिमला में 3 जनवरी को मामले की सुनवाई रख दी है। नोटिस में लिखा है कि अगर सुनवाई में कांगड़ा के संबंधित अफसर उपस्थित न भी हुए तो जमीन केस में 3 जनवरी को फैसला सुना दिया जाएगा। एसडीएम धर्मशाला, डीसी कांगड़ा और जिला राजस्व अधिकारी मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

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क्या है केस

धर्मशाला के एक व्यक्ति ने दाड़ी स्थित करीब 5 कनाल सरकारी जमीन का मालिकाना हक लेने को राजस्व अधिकारियों के पास प्रार्थना पत्र दिया था। हवाला दिया कि जमीन पर करीब 1943 से उसके पुरखों का कब्जा है। पुरखे सरकार को लगान देते थे, इसलिए उसे जमीन का मालिकाना हक मिलना चाहिए। अधिकारियों ने जब राजस्व रिकॉर्ड चेक किया तो कब्जाधारक की जमीन सरकार के नाम पर पाई गई।

पाया गया कि सरकार को कोई लगान नहीं मिला है। अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए कब्जाधारक को सरकारी जमीन का मालिकाना हक देने से इंकार कर केस को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद जमीन का केस अप्रूव करने को पक्ष और विपक्ष के तीन नेताओं ने अफसरों पर सियासी दबाव बनाया। मामला सत्तापक्ष के उच्च पदों तक पहुंचा। अब सियासी चाल चलकर जमीन शिमला से हड़पने की तैयारी कर ली गई है। 

पेट्रोल पंप की चाहत में शुरू हुआ सियासी खेल 
सूत्रों के अनुसार कब्जाधारक व्यक्ति सरकारी जमीन पर पेट्रोल पंप बनाना चाहता है। पेट्रोल पंप लगाने वाली कंपनी ने व्यक्ति से जमीन के मालिकाना हक वाले कागजात मांगे हैं। कंपनी में कागजात जमा कराने की अंतिम तारीख 5 जनवरी तक है। इसलिए, शिमला में तीन जनवरी को केस की सुनवाई होने को सियासी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कब्जाधारक कुछ माह में एक विधायक का समधी भी बनने वाला है।

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