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Dharamshala Student Death Case: आरोपी प्रोफेसर और छात्रा को कोर्ट ने दी जमानत, जांच में करेंगे सहयोग

Tue, 17 Feb 2026 09:18 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 17 Feb 2026 09:18 PM IST
सार

 छात्रा की मौत, रैगिंग और यौन उत्पीड़न के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय धर्मशाला ने आरोपी प्रोफेसर और छात्रा को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं मंजूर कर ली हैं। 

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College girl student death case: Court grants bail to accused professor and student, will cooperate in investi
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की एक छात्रा की मौत, रैगिंग और यौन उत्पीड़न के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय धर्मशाला ने आरोपी प्रोफेसर और छात्रा को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं मंजूर कर ली हैं। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की अदालत ने सुनाया है। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने बताया कि अब तक की जांच में फोन डाटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, कॉलेज उपस्थिति, मेडिकल बोर्ड की राय, उच्च शिक्षा निदेशालय की जांच रिपोर्ट, पॉलीग्राफ और अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस-विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं आया है।

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इस रिपोर्ट के आधार पर ही न्यायालय ने यह आदेश पारित किए हैं और आदेश दिया कि दोनों आरोपी जांच में सहयोग करते रहेंगे, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रा की मौत से पहले वायरल वीडियो क्लिप्स की सत्यता की जांच अभी अधूरी है और यदि आगे चलकर कोई ठोस साक्ष्य सामने आता है तो पुलिस गंभीर धाराएं जोड़कर कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ित छात्रा 29 जुलाई 2025 के बाद कॉलेज नहीं गई थी और द्वितीय वर्ष की पढ़ाई ऑनलाइन कर रही थी। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार वह मानसिक बीमारी (स्किजोफ्रेनिया स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर) से जूझ रही थी।

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जांच एजेंसी ने भी आरोपियों की हिरासत आवश्यक नहीं बताई
मामले के आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए इस मंजूर किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें सजा सात वर्ष से कम है और नए कानून बीएनएसएस की धारा 35(3) और सुप्रीम कोर्ट के ‘अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ फैसले के अनुसार ऐसे मामलों में गिरफ्तारी अपवाद है, नियम नहीं। चूंकि जांच एजेंसी ने भी आरोपियों की हिरासत आवश्यक नहीं बताई, इसलिए अग्रिम जमानत दी जाना उचित है।

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