जिला परिषद चुनाव में उतर गए वीरभद्र और धूमल
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जिला परिषद कांगड़ा के चुनाव में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी उतर आए हैं। जिला परिषद कांगड़ा के चुनाव से ठीक एक दिन पहले वीरभद्र सिंह और धूमल ने धर्मशाला का अचानक दौरा कर अपने-अपने नेताओं से जिप पर जीत को लेकर फीडबैक ली।
दोनों नेता जिला परिषद सदस्यों से मिले और जिला परिषद पर अपना-अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने के लिए रणनीति बनाई। जिला परिषद कांगड़ा की विशेषता के मद्देनजर मुख्यमंत्री सोलन दौरा बीच में रद्द कर उड़नखटोले से वीरवार सुबह 11 बजे धर्मशाला पहुंचे।
उन्होंने परिधि गृह धर्मशाला में कांगड़ा जिले के सभी मंत्रियों और विधायकों सहित अन्य नेताओं को जिला परिषद चुनाव को लेकर बैठक में बुलाकर जीत के लिए रणनीति बनाई। सभी नेता अपने क्षेत्रों से कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्यों को साथ लेकर परिधि गृह पहुंचे।
यहां मुख्यमंत्री जिप सदस्यों से मिले और कांग्रेस की जीत पुख्ता करने के लिए कहा। बैठक में परिवहन मंत्री जीएस बाली, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया सहित कांगड़ा जिले के विधायक मौजूद रहे।
जिला परिषद चुनाव की फीडबैक लेकर मुख्यमंत्री दोपहर बाद दिल्ली रवाना हो गए। जाते-जाते जिला परिषद पर कांग्रेस की जीत का दावा कर गए। जिला परिषद की चेयरमैनी के लिए चुनाव से एक दिन पहले मुख्यमंत्री के दौरे को सियासी मायनों में काफी अहम माना जा रहा है।
पूर्व सीएम धूमल ने भी झोंकी ताकत
उधर, मुख्यमंत्री की बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल भी शाम को जिला परिषद चुनाव की फीडबैक लेने धर्मशाला में पूर्व मंत्री किशन कपूर के होटल कार्निका में पहुंचे। इस दौरान भाजपा समर्थित जिप सदस्यों से मिले।
धूमल ने जिला परिषद सदस्यों से भाजपा समर्थित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को जिताने का आह्वान किया। धूमल ने होटल कार्निका में जिला परिषद चुनाव को लेकर भाजपा के नेताओं के साथ बैठक कर रणनीति भी बनाई। बैठक में विधायक रविंद्र रवि, सरवीण चौधरी, भाजपा के प्रदेश महामंत्री विपिन परमार, पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा, राकेश पठानिया सहित कई नेता मौजूद रहे।
जिला परिषद पर अपनी अपनी पार्टी का कब्जा करने के लिए भले ही वीरभद्र सिंह और धूमल दोनों नेता उतर आए हों, लेकिन 29 जनवरी को मैजिक नंबर ही अहम रहेगा। जिसके पास मैजिक नंबर होंगे, उसी को जिला परिषद की सरदारी मिलेगी। हालांकि, दोनों दल जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की जीत के लिए अपना अपना बहुमत होने का दावा कर रहे हैं।