Himachal: सीएम सुक्खू बोले- नाहन, नालागढ़ और मौहल में तीन नए दुग्ध संयंत्र स्थापित होंगे
राज्य में डेयरी गतिविधियों में सुधार के लिए नाहन, नालागढ़ और मौहल में 20 हजार एलपीडी क्षमता के तीन नए संयंत्र राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) 2.0 परियोजना में स्थापित किए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य में डेयरी गतिविधियों में सुधार के लिए नाहन, नालागढ़ और मौहल में 20 हजार एलपीडी क्षमता के तीन नए संयंत्र राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) 2.0 परियोजना में स्थापित किए जाएंगे। इससे अधिक से अधिक किसानों को नई समितियों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इससे दूध की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। ऊना और हमीरपुर में दो मिल्क चिलिंग सेंटर और रोहडू में 20 हजार एलपीडी क्षमता का दूध प्रसंस्करण संयंत्र जाइका परियोजना में स्थापित किया जाएगा और दूरदराज के क्षेत्रों से दूध एकत्रित कर किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा।
सीएम ने कहा कि दूध उत्पादकों को भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए प्रसंघ पूरे राज्य में स्वचालित मिल्क कलेक्शन यूनिट (एएमसीयूएस) स्थापित कर रहा है। स्वच्छ और पोषक दूध के उत्पादन के लिए गांवों में ही दूध शीतलन केंद्र और मिनी प्रसंस्करण प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रसंघ ने प्रदेश में अलग-अलग क्षमता के बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए हैं। दुग्ध उत्पादक समितियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने दूरदर्शी सोच अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि गांव, किसान, महिलाएं और ग्रामीण युवा प्रदेश की आर्थिक प्रगति के केंद्र में हों। इसी नीति में दूध उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू हुआ है, जो हिमाचल के इतिहास में एक उल्लेखनीय और क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, प्राकृतिक खेती और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं।
न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधारी
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने देश में पहली बार दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ 38,400 किसानों से प्रतिदिन औसतन 2.25 लाख लीटर गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान प्रसंघ की ओर से औसतन 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन दूध की खरीद की गई। इसी प्रकार 1,482 भैंसपालकों से प्रतिदिन 7,800 लीटर दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है।
एक नई पहल में ऊना में पायलट आधार पर बकरी पालकों से 70 रुपये प्रति लीटर की दर से बकरी का दूध खरीदा जा रहा है। इसी प्रकार प्रसंघ की ओर से किसानों से प्रतिदिन कुल मिलाकर 2.32 लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है। दुग्ध समितियों को प्रोत्साहन देने के लिए परिवहन सब्सिडी 1.50 रुपये से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। दो किलोमीटर से अधिक दूरी तक दूध खरीद केंद्र तक स्वयं दूध ले जाने वाले पशुपालकों और समितियों को 2 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है।