Shimla News: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- फील्ड में उतरें अधिकारी, वन विस्तार और वन संरक्षण को दें समय
मुख्यमंत्री ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना का शुभारंभ भी किया। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े मंत्रियों और विधायकों से संवाद किया।
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार व्यवस्था परिवर्तन के मकसद से वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने पर फोकस कर रही है। सुनिश्चित किया जा रहा है कि वन विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव लाया जाए। वन अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली के साथ-साथ अधिकांश समय फील्ड में वन विस्तार व वन संरक्षण को समर्पित करें। प्राकृतिक आपदा को लेकर सीएम सुक्खू ने कहा कि आईटी रुड़की और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों की टीमें प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुकी हैं। इन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सीएम ने वीरवार को शिमला के कनलोग क्षेत्र में 76वां राज्य स्तरीय वन महोत्सव का शुभारंभ देवदार का पौधा लगाकर किया। इस वर्ष लगभग नौ हजार हेक्टेयर वन भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा, जिसमें 60 प्रतिशत फलदार पौधे शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की समृद्ध जैव विविधता को और संरक्षित व समृद्ध बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत वन आवरण बढ़ाने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। सुक्खू ने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना से वन विकास के साथ-साथ जन सहभागिता बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
इस योजना के तहत साल 2030 तक महिला मंडल, युवक मंडल, स्वयं सहायता समूह और संयुक्त वन समितियां एक से पांच हेक्टेयर चयनित वन भूमि पर न केवल पौधे लगाएंगी, बल्कि पांच वर्ष तक उनकी देखभाल भी करेंगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 20 करोड़ रुपये की लागत से 1000 से 1500 हेक्टेयर वन भूमि पर पौधरोपण किया जा रहा है। पौधरोपण व पौधों की देखभाल के लिए एक लाख 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर भी प्रदान किए जा रहे हैं।
उम्मीद, जल्द केंद्र से मिलेगा राहत पैकेज
उन्होंने बताया कि विशेष पैकेज की मांग की गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और चारों सांसद इस मुद्दे को लेकर दिल्ली गए थे, विशेषकर सराज क्षेत्र में आपदा के दौरान यह मांग उठाई गई थी। हालांकि, अभी तक केंद्र से कोई सीधी सहायता प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही राहत पैकेज मिलेगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह व्यवस्था परिवर्तन है, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा मानसून सत्र चलेगा। वह चाहते हैं कि विपक्ष सही मुद्दों को लेकर सार्थक चर्चा करे। आरोप लगाना उद्देश्य नहीं है, तर्क व साक्ष्य के साथ बात होनी चाहिए। प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अच्छे सुझाव दें, वॉकआउट न करें। विपक्ष को ज्यादा समय देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वॉकआउट से एक दिन की न्यूज तो बन जाती है, लेकिन प्रदेश का उत्थान नहीं होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की आपस में लड़ाई है और इनके ग्रुप हैं। यह विधायक दल के नेता की बात नहीं सुनते।
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