हिमाचल से बाहर इलाज कराने पर भी मिलेगी सरकारी मदद
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हिमाचल के सरकारी अस्पतालों के अलावा बाहर के स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार करवाने पर भी जरूरतमंदों को मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से मदद दी जाएगी। प्रदेश के बाहर पीजीआई चंडीगढ़, राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) अस्पताल, सेक्टर-32, चंडीगढ़, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) दिल्ली में उपचार करवाने पर भी इस कोष से सहायता मिलेगी। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पताल भी इसमें शामिल किए गए हैं।
इन बीमारियों के उपचार पर मिलेगा पैसा
मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें कार्डियक (हृदय) और कार्डियोथौरेसिक (हृदय तथा वक्ष संबंधी) शल्य चिकित्सा, जेनिटो यूरिनरी (मूत्र तंत्र संबंधी) शल्य चिकित्सा, न्यूरो सर्जरी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, ट्रॉमा, रीढ़ की हड्डी की शल्य चिकित्सा, सर्जिकल गैस्ट्रो एंट्रोलॉजी, हिमोफीलिया (अधिक रक्त स्राव), कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां शामिल की गई हैं। जरूरतमंद गरीब लोगों को कोष के माध्यम से बहिरंग विभाग और अन्य विविध खर्चों की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान रखा गया है।
लाभ लेने के लिए ये दस्तावेज जरूरी
लाभार्थी को आर्थिक सहायता लेने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय शिमला में आवेदन करना होगा। इनमें उपचार अनुमान प्रमाण पत्र (ट्रीटमेंट एस्टीमेट सर्टिफिकेट) राशन कार्ड अथवा बीपीएल कार्ड, यदि लाभार्थी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री राज्य स्वास्थ्य देखभाल योजना या सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में पात्र है तो इन योजनाओं का कार्ड, पहचान पत्र आवेदन के साथ संलग्न करना होगा। यदि किसी लाभार्थी ने पहले उपचार करवा लिया है तो वह भी उक्त दस्तावेजों के साथ सत्यापित बिलों की प्रतियां लगाकर आवेदन कर सकता है।
मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के तहत जरूरतमंदों की आर्थिक मदद की जाएगी। सूबे के बाहर के स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार करने पर भी कोष के तहत पात्र लोगों को राशि दी जाएगी। - विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री