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Shimla News: प्लास्टिक कचरे से अब घर बैठ कर पैसा कमा सकेंगे शहरवासी
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प्लास्टिक 75 रुपये प्रति किलो खरीदेगा निगम
राजधानी को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने की कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दूध, दही, बिस्किट, नमकीन आदि के प्लास्टिक पैकेट कूड़ेदान में फेंकने की बजाय नगर निगम को देकर अब शहरवासी पैसा कमा सकेंगे। नगर निगम यह कचरा 75 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदेगा। साथ ही घरों से यह कचरा उठाने के लिए नगर निगम अब कर्मचारी की भी सुविधा देगा। हिल्स क्वीन शिमला को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम शिमला ने नई योजना शुरू कर दी है। शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा निगम को देने की योजना पहले भी लागू की थी लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं चली। लोग घरों पर कचरा तो जमा कर रहे थे लेकिन इसे बेचने नगर निगम के केंद्रों पर नहीं आ रहे थे। इस बार निगम ने घर से इस कचरे को उठाने की भी सुविधा दे दी है।
उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में बुधवार को इस योजना को लेकर बैठक भी बुलाई गई थी। निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतन चौहान ने कर्मचारियों को इसे बढ़ावा देने को कहा। नगर निगम के अनुसार आम जनता के अलावा कूड़ा बीनने वाले लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पहाड़ियों पर फैला सिंगल यूज प्लास्टिक उठाकर नगर निगम को दिया जा सकता है।
इस प्लास्टिक को बेच सकेंगे
नगर निगम के अनुसार ब्रेड, केक, बिस्किट, कुकीज, नमकीन, कुरकुरे, चिप्स, वेफर्स, कैंडीज, पनीर पैकेट, आईसक्रीम कैंडीज, नूडल्स, अनाज, कॉर्नफ्लेक्स, लस्सी, दूध, दही, जूस आदि के प्लास्टिक पाउच खरीदे जाएंगे। इन्हें साफ और सूखाकर देना होगा। हर वार्ड में निगम ने कनिष्ठ अभियंता कार्यालयों में भी इस कचरे को इकट्ठा करने के लिए केंद्र बनाए हैं। लोग हर शनिवार को इनमें जाकर प्लास्टिक कचरा दे सकते हैं। इसके अलावा जो लोग खुद नहीं जा सकते, वह सुबह कचरा उठाने वाले कर्मचारी को इसे दे सकते हैं। ऐसा करने पर 75 रुपये में से 25 रुपये कर्मचारी को देना होगा।
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बैठक बुलाई, चाय तक नहीं पिलाई : अध्यक्ष
बैठक में पहुंचे सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि वह घरों से पहले ही यह कचरा उठाते हैं। आगे भी इसमें सहयोग करेंगे। कहा कि नगर निगम ने दो घंटे तक कर्मचारियों को बैठक में बिठाए रखा लेकिन उनके लिए चाय-पानी तक की व्यवस्था नहीं की। कहा कि अधिकारी सफाई कर्मचारियों से भेदभाव करते हैं जो गलत हैं।
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राजधानी को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने की कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दूध, दही, बिस्किट, नमकीन आदि के प्लास्टिक पैकेट कूड़ेदान में फेंकने की बजाय नगर निगम को देकर अब शहरवासी पैसा कमा सकेंगे। नगर निगम यह कचरा 75 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदेगा। साथ ही घरों से यह कचरा उठाने के लिए नगर निगम अब कर्मचारी की भी सुविधा देगा। हिल्स क्वीन शिमला को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम शिमला ने नई योजना शुरू कर दी है। शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा निगम को देने की योजना पहले भी लागू की थी लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं चली। लोग घरों पर कचरा तो जमा कर रहे थे लेकिन इसे बेचने नगर निगम के केंद्रों पर नहीं आ रहे थे। इस बार निगम ने घर से इस कचरे को उठाने की भी सुविधा दे दी है।
उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में बुधवार को इस योजना को लेकर बैठक भी बुलाई गई थी। निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतन चौहान ने कर्मचारियों को इसे बढ़ावा देने को कहा। नगर निगम के अनुसार आम जनता के अलावा कूड़ा बीनने वाले लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पहाड़ियों पर फैला सिंगल यूज प्लास्टिक उठाकर नगर निगम को दिया जा सकता है।
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इस प्लास्टिक को बेच सकेंगे
नगर निगम के अनुसार ब्रेड, केक, बिस्किट, कुकीज, नमकीन, कुरकुरे, चिप्स, वेफर्स, कैंडीज, पनीर पैकेट, आईसक्रीम कैंडीज, नूडल्स, अनाज, कॉर्नफ्लेक्स, लस्सी, दूध, दही, जूस आदि के प्लास्टिक पाउच खरीदे जाएंगे। इन्हें साफ और सूखाकर देना होगा। हर वार्ड में निगम ने कनिष्ठ अभियंता कार्यालयों में भी इस कचरे को इकट्ठा करने के लिए केंद्र बनाए हैं। लोग हर शनिवार को इनमें जाकर प्लास्टिक कचरा दे सकते हैं। इसके अलावा जो लोग खुद नहीं जा सकते, वह सुबह कचरा उठाने वाले कर्मचारी को इसे दे सकते हैं। ऐसा करने पर 75 रुपये में से 25 रुपये कर्मचारी को देना होगा।
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बैठक बुलाई, चाय तक नहीं पिलाई : अध्यक्ष
बैठक में पहुंचे सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि वह घरों से पहले ही यह कचरा उठाते हैं। आगे भी इसमें सहयोग करेंगे। कहा कि नगर निगम ने दो घंटे तक कर्मचारियों को बैठक में बिठाए रखा लेकिन उनके लिए चाय-पानी तक की व्यवस्था नहीं की। कहा कि अधिकारी सफाई कर्मचारियों से भेदभाव करते हैं जो गलत हैं।