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हिमाचल: मजदूरों की मांगों को लेकर सीटू ने प्रदेश भर में बोला हल्ला
Wed, 12 Oct 2022 06:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 12 Oct 2022 06:37 PM IST
सार
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंद्र कुमार ने मांग की है कि मनरेगा मजदूरों की पहले की भांति राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड में सदस्यता जारी रखी जाए और निर्धारित सभी आर्थिक लाभ जारी किए जाएं।
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सीटू (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीटू ने मजदूरों की मांगों को लेकर बुधवार को प्रदेश भर में आंदोलन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सीटू नेताओं ने चेताया है कि अगर मनरेगा मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड के दायरे से बाहर किया गया तो प्रदेश भर में आंदोलन करेंगे। राजधानी शिमला में भी सीटू ने आंदोलन किया और सरकार का कड़ा विरोध किया। रामपुर, रोहड़ू, सराहन, सोलन, कुल्लु, बंजार, आनी, धर्मपुर, बालीचौकी, नगरोटा बगवां, चंबा, हमीरपुर, ऊना में भी प्रदर्शन किया गया।
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सीटू के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंद्र कुमार और महासचिव भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2013 में मनरेगा मजदूरों को राज्य श्रमिक कल्याण बोर्डों का सदस्य बनाने और बोर्ड से मिलने वाले सभी लाभ देने का निर्णय लिया गया था। इसके चलते हिमाचल में लगभग दो लाख मनरेगा मजदूर श्रमिक कल्याण बोर्ड के सदस्य बने हैं।
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इन्हें अब तक श्रमिक कल्याण बोर्ड से करोड़ों रुपये की सहायता राशि प्रदान हुई है। 20 सितंबर को मंडी में श्रमिक कल्याण बोर्ड की मीटिंग में मनरेगा मजदूरों की बोर्ड से सदस्यता रद्द करने और सभी प्रकार के लाभ बंद करने बारे चर्चा हई है। इसका बोर्ड में सीटू के प्रतिनिधि जोगिंद्र कुमार ने कड़ा विरोध किया। इसके चलते मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे हिमाचल प्रदेश के श्रम मंत्री ने इसे लागू न करने का आश्वासन दिया।
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कामगारों की मांगें
नेताओं ने मांग की है कि मनरेगा मजदूरों की पहले की भांति राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड में सदस्यता जारी रखी जाए और निर्धारित सभी आर्थिक लाभ जारी किए जाएं। पिछले दो साल की लंबित सहायता राशि तुरंत मजदूरों को जारी की जाए। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड से पूर्व में मिलने वाली सहायता सामग्री पुन: बहाल की जाए। मनरेगा मजदूरों को अन्य दिहाड़ीदार मजदूरों के बराबर 350 रुपये दिहाड़ी दी जाए। मनरेगा में 120 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाए और दिनों की संख्या 200 दिन वार्षिक की जाए।