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भारत को कभी अपनी बराबरी का नहीं मानता चीन

Tue, 19 May 2015 09:36 AM IST
Updated Tue, 19 May 2015 09:36 AM IST
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china underestimating india power.

पीएम मोदी भले ही चीन की यात्रा कर दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हों लेकिन चीन भारत के बारे में क्या सोचता है, इसका एक ताजा पहलू सामने आया है। चीन ने भारत को कभी बराबरी में नहीं माना। यह खुलासा चीन के एक शोधार्थी चाओ झी ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में ‘भारत के परिदृश्य में हथियारों का नियंत्रण तथा नि:शस्त्रीकरण’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत कर किया।

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उन्होंने इस शोध पत्र में स्पष्ट किया कि चीन के रणनीतिकार मानते हैं कि भारत की बनावटी नीति इसके आर्थिक एवं मिलिट्री पोटेंशियल को सीमित करती रहेगी। चीन में अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के तहत छिंगुआ यूनिवर्सिटी में डेवलपिंग कंट्री स्टडीज विषय में शोध कर रहे चाओ झी ने एक शोध पत्र पढ़ा।
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भारत के न्यूक्लीयर हथियारों से संबंधित परिचय को भी चीन अंडरप्ले कर रहा है। हालांकि, चीन को ऐसे करते रहना मुश्किल में डालता जा रहा है। फिर भी भारत से परमाणु खतरे पर चीन को ध्यान देने की जरूरत है।
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सिर्फ अमेरिका से ही तुलना करते हैं चीनी

china underestimating india power.

चाओ झी ने अपने शोध में कहा कि भारत लगातार खुद को चीन की ओर बेंच मार्क करता रहा है। चीन के रणनीतिकारों और निर्णायक लोगों ने कभी भी चीन को एशियन पावर के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया। उन्होंने हमेशा चीन को वैश्विक शक्ति के रूप में देखा।

चीन की तुलना केवल अमेरिका से ही की। चीन ने भारत को कभी अपने बराबर नहीं माना। समय कम होने के कारण चाओ झी शोध पत्र के बीच-बीच के अंश ही पढ़ते रहे। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से उच्च अध्ययन संस्थान में यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 18 से 20 मई तक छह सत्रों में चल रहा है।

इसमें देश भर से लगभग 27 जाने-माने प्रतिभागी हथियारों की रोक तथा नि:शस्त्रीकरण पर चर्चा करेंगे। इनमें पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक, एयर मार्शल विनोद पटनेई और एयर वाइस मार्शल कपिल काक के अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए विद्वान शामिल हैं।

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