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Shimla News: सीएचसी दिग्गल प्रतिनियुक्ति चिकित्सकों के सहारे, सप्ताह में चार दिन आते हैं चिकित्सक
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संस्थान का दर्जा बढ़ने के बावजूद स्थायी चिकित्सक नहीं, मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा
दो दिन फार्मासिस्ट ही चलाता है काम
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ क्षेत्र के दिग्गल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टर और स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार पीएचसी से सीएचसी का दर्जा बढ़ने के बावजूद यहां स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है, जिससे अस्पताल केवल नाम का सीएचसी बनकर रह गया है। स्थिति यह है कि एकमात्र तैनात चिकित्सक के विदेश जाने के बाद पद रिक्त नहीं माना गया, जिसके चलते नया डॉक्टर भी नियुक्त नहीं किया जा सका। नतीजतन भियुंखरी और क्वारनी पीएचसी से डॉक्टरों को दो-दो दिन के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजकर व्यवस्था चलाई जा रही है। ऐसे में संबंधित पीएचसी भी उन दिनों खाली रह जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्ताह में केवल चार दिन ही डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं, जबकि शेष दो दिन अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चलता है। इससे ओपीडी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और मरीज इलाज के लिए अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीण जय सिंह ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थान तो खोल दिए हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में सीएचसी में केवल एक नर्स और एक फार्मासिस्ट कार्यरत हैं।
कोट
चिकित्सक अवकाश पर होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के तहत भियुंखरी और क्वारनी से डॉक्टर भेजे जा रहे हैं। सीएचसी में मरीजों की संख्या भी कम है।
डॉ. कविराज नेगी, बीएमओ
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दो दिन फार्मासिस्ट ही चलाता है काम
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ क्षेत्र के दिग्गल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टर और स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार पीएचसी से सीएचसी का दर्जा बढ़ने के बावजूद यहां स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है, जिससे अस्पताल केवल नाम का सीएचसी बनकर रह गया है। स्थिति यह है कि एकमात्र तैनात चिकित्सक के विदेश जाने के बाद पद रिक्त नहीं माना गया, जिसके चलते नया डॉक्टर भी नियुक्त नहीं किया जा सका। नतीजतन भियुंखरी और क्वारनी पीएचसी से डॉक्टरों को दो-दो दिन के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजकर व्यवस्था चलाई जा रही है। ऐसे में संबंधित पीएचसी भी उन दिनों खाली रह जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्ताह में केवल चार दिन ही डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं, जबकि शेष दो दिन अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चलता है। इससे ओपीडी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और मरीज इलाज के लिए अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीण जय सिंह ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थान तो खोल दिए हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में सीएचसी में केवल एक नर्स और एक फार्मासिस्ट कार्यरत हैं।
कोट
चिकित्सक अवकाश पर होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के तहत भियुंखरी और क्वारनी से डॉक्टर भेजे जा रहे हैं। सीएचसी में मरीजों की संख्या भी कम है।
डॉ. कविराज नेगी, बीएमओ