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स्मृति शेष: जब मैदान जाना बंद हुआ तो ओलंपियन चरणजीत खिलाड़ियों का फोन पर करते थे मार्गदर्शन

Fri, 28 Jan 2022 11:12 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Fri, 28 Jan 2022 11:12 AM IST
सार

हॉकी कोच आशीष सेन ने बताया कि पद्मश्री चरणजीत सिंह का उन्हें हमेशा पॉजिटिव रिस्पांस मिला। खिलाड़ियों के प्रति भी उनका रवैया हमेशा सकारात्मक रहा। फोन कॉल पर भी खिलाड़ियों में जोश भर देते। 

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Charanjit Singh Used to guide the players over the phone when he stopped going  in the ground
पद्मश्री दिवंगत चरणजीत सिंह(फाइल) - फोटो : संवाद

विस्तार

अधरंग होने के बावजूद पद्मश्री दिवंगत चरणजीत सिंह का खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने का सिलसिला लगातार जारी रहा। बेशक इस रोग से ग्रस्त होने के बाद उनका मैदान में जाना बंद हो गया, लेकिन युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन जारी रहा। फोन कॉल और घर पर खिलाड़ियों को वह खेल संबंधी टिप्स देते। युवाओं को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते। बीमार रहने के बावजूद वह खिलाड़ियों से मिलने को कभी मना नहीं करते। घर आए खिलाड़ियों के साथ लंबी चर्चा कर उन्हें खेल में आ रही दिक्कतों को दूर करने का प्रयास करते।

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चरणजीत सिंह से मिलना भी हॉकी खिलाड़ियों के लिए सपना पूरा होने जैसा रहता। हॉकी कोच आशीष सेन ने बताया कि पद्मश्री चरणजीत सिंह का उन्हें हमेशा पॉजिटिव रिस्पांस मिला। खिलाड़ियों के प्रति भी उनका रवैया हमेशा सकारात्मक रहा। फोन कॉल पर भी खिलाड़ियों में जोश भर देते। उनके द्वारा प्रेरणा देने से खिलाड़ियों की थकान भी चंद मिनटों में ही दूर हो जाती थी। उन्होंने घर पर भी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। निश्चित तौर पर उनका जाना प्रदेश खासकर ऊना के खिलाड़ियों के निजी क्षति है। 
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हिमाचल में खेल सुविधाएं कम होने पर रहते थे चिंतित
चरणजीत सिंह हिमाचल में खेल सुविधाओं में कमी पर काफी चिंता जताते थे। उनका मानना था कि सुविधाओं के अभाव में ही खिलाड़ी पंजाब का रुख कर रहे हैं। वह ग्रामीण प्रतिभा को आगे लाने के पक्षधर थे।
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बीमारी में भी कम नहीं रहा हॉकी का जुनून
 भारतीय हॉकी टीम का मैच देखने का कोई मौका पद्मश्री चरणजीत सिंह नहीं छोड़ते थे। हाल ही में टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का कोई भी मैच चरणजीत सिंह ने देखने से नहीं छोड़ा। टोक्यो ओलंपिक में हॉकी टीम का उन्होंने मनोबल बढ़ाया। बीमार होने के बावजूद हॉकी मैच देखना वह नहीं भूले। सेमीफाइनल में पुरुष हॉकी टीम के पहुंचने पर खुशी जताते हुए उन्होंने टीम के समक्ष कई चुनौतियां बताई थी। जोकि मैच में देखने को भी मिली। उम्र के इस पड़ाव में भी हॉकी के प्रति उनकी रुचि कम नहीं हुई थी।


हॉकी का जुनून ओलंपिक के दौरान उनकी टी-शर्ट को देखकर ही पता चलता था। वह इस दौरान ओलंपिक टी-शर्ट ही पहनते थे। सेहत ठीक न होने के बावजूद उनकी दिनचर्या में हॉकी के मैच शामिल रहते। चरणजीत सिंह के छोटे भाई भूपिंद्र सिंह की मानें तो बीमार रहने के बावजूद उन्होंने ओलंपिक में हॉकी मैच पर पूरी नजर रखी। वह इसकी जानकारी लेते रहते। मैच के दौरान होने वाली घटनाओं की चर्चा भी करते रहे। ओलंपिक पर खास निगरानी रही। उन्होंने बताया कि हॉकी को लेकर उनका जुनून आखिरी समय तक जारी रहा। हॉकी को लेकर हमेशा उनका चिंतन जारी रहा। 

 

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