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मोदी के प्लान से पहाड़ों में बहेगी विकास की बयार

Sat, 25 Oct 2014 07:28 PM IST
Updated Sat, 25 Oct 2014 07:28 PM IST
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center government is going to simplify process of forest clearance.

हिमाचल प्रदेश सहित पहाड़ी रात्यों में के लिए अच्छी सूचना है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को और आसान बनाने जा रही है।

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हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर सहित देश के तमाम पर्वतीय राज्यों के लिए अच्छी सूचना है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को और आसान बनाने जा रही है, जिससे विकास और औद्योगिक गतिविधियों को तेज किया जा सके।
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इस सिलसिले में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने देश भर के तमाम राज्यों से वन, पर्यावरण, वन्यजीव से जुड़े अधिनियमों को सरल और व्यवहारिक बनाने के लिए सुझाव मंगाए हैं।
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इस सिलसिले में जल्द ही हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी सुझाव केंद्र को भेजे जाएंगे। मौजूदा समय में वन, पर्यावरण, वन्यजीव से जुड़े अधिनियम इतने सख्त हैं कि तमाम योजनाएं ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सालों तक फाइलें धूल फांकती रह जाती हैं।

मोदी के मेक इन इंडिया प्लॉन का रोड़ा

center government is going to simplify process of forest clearance.

इससे मोदी के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को भी झटका लग सकता है। क्योंकि, औद्योगिक इकाइयों को ग्रीन सिग्नल न मिल पाने की स्थिति में औद्योगिक उत्पादन नहीं बढ़ पाएगा। तमाम उप नियम रास्ते में रोड़ा बन सकते हैं।

इसके अलावा सड़कों, पनबिजली परियोजनाओं सहित अन्य प्रोजेक्ट पर भी संशय बना रहता है। इसकी आड़ में फाइलें लंबे समय तक लालफीताशाही में फंसी रहती हैं, जिससे सीधे तौर पर विकास की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसको ध्यान में रखकर मोदी सरकार की ओर से नियमों में बदलाव के लिए हिमाचल सहित सभी राज्यों से सुझाव मंगाए गए हैं।

हर साल हजार से ज्यादा योजनाएं

हिमाचल प्रदेश में हर साल एक हजार से अधिक योजनाएं प्रस्तावित की जाती हैं। इनमें 70 फीसदी से अधिक योजनाओं के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की जरूरत होती है, लेकिन समय से क्लीयरेंस न मिल पाने के कारण सालों तक तमाम योजनाएं यूं ही पड़ी रहती हैं।

मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश पी. मित्रा ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जो सुझाव मांगे गए हैं, उसे समय से प्रदेश सरकार की ओर से भेज दिया जाएगा।

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