Cement Plant Dispute: सीमेंट ढुलाई रेट की अधिसूचना पर टिका ट्रक ऑपरेटरों के आंदोलन का अगला रुख
दाड़लाघाट और बरमाणा में ट्रक ऑपरेटरों के आंदोलन का रुख सीमेंट ढुलाई रेट की अधिसूचना पर टिका है। पहाड़ी राज्यों के सीमेंट दाम से मैदानी इलाकों के रेट की तुलना से यह विवाद ज्यादा उलझा है।
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इसका कारण है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रकों के पुर्जोँ की टूट-फूट ज्यादा होती है। मैदानी इलाकों में मरम्मत का खर्च कम होता है। पहाड़ी इलाकों में माल ढुलाई पर प्रति किलोेमीटर ज्यादा डीजल खर्च होता है। इन पहलुओं को ध्यान में रखकर पहाड़ी राज्यों में माल ढुलाई की दरें अपेक्षाकृत ज्यादा रहती हैं। एसडीटीओ के कोषाध्यक्ष राम कृष्ण शर्मा कहते हैं कि मैदानों में सीमेंट और अन्य माल भाड़ा पहले से ही कम रहता है। मैदानी इलाकों के मुकाबले पहाड़ी प्रदेशों में ट्रक की टूट-फूट अपेक्षाकृत ज्यादा होती है और डीजल की माइलेज कम आती है। पहाड़ों में माल ढुलाई का खर्च ज्यादा आता है, जबकि मैदानों में यह खर्चा कम होता है।
सीमेंट के रेट घटाने का उठा मुद्दा, किराया घटाने में अड़ा प्रबंधन
सरकार ने सत्ता संभालने के बाद सीमेंट कंपनी पर सीमेंट के रेट घटाने का दबाव डाला तो सीमेंट कंपनी ने ट्रक भाड़ा घटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सरकार भी अपना ध्यान सीमेंट ढुलाई का भाड़ा कम करने पर केंद्रित करती रही। सीमेंट की उत्पादन लागत पड़ोसी राज्यों में क्या रहती है और हिमाचल में कितनी है? इस दिशा में सरकार ने कोई गैर अभी तक नहीं किया। सीमेंट विवाद बढ़ते ही यह मामला ट्रक मालिक भी मुखर होकर उठाने लगे हैं।
सरकार का अदाणी को दो टूक, ट्रकों की संख्या नहीं घटेगी
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार का अदाणी को दो टूक संदेश दे दिया है कि सीमेंट ढुलाई में लगे ट्रकों की संख्या नहीं घटेगी। जिस तरह से सीमेंट प्लांट को पहले प्रबंधन चला रहा था, उसी प्रकार अब भी चलाना होगा।
मंत्री ने अदाणी को संदेश पहुंचा दिया है कि सरकार को बताए बिना अंबुजा और बरमाणा सीमेंट प्लांट बंद क्यों किए? इस फैसले से पहले वार्ता की जानी चाहिए थी। अगर वार्ता में कोई हल नहीं निकलता तो सरकार के पास मामला लाया जाना चाहिए था।
ट्रक संचालकों ने ठुकरा दी थी माल भाड़ा कम करने की मांग : अदाणी
हिमाचल प्रदेश परमानेंट स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन को लिखे एक पत्र में अदाणी समूह के सीईओ अजय कपूर ने कहा कि परिवहन बाजार पूरी तरह ट्रांसपोर्ट यूनियनों की ओर से नियंत्रित किया जाता है। जो ट्रकों की दरें और तैनाती तय करते हैं। कहा कि ट्रांसपोर्ट यूनियनों के माल ढुलाई दर और वितरण मॉडल पर अव्यवहार्य स्थिति अपनाने के बाद परिचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। अदाणी के प्रवक्ता ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि अदाणी समूह ने इन प्लांट को बंद कर दिया। प्रबंधन ट्रक संचालकों से मालभाड़ा कम करने के लिए कह रहा था, लेकिन ट्रक यूनियनों ने इस मांग को ठुकरा दिया।
सीमेंट माल भाड़े पर गतिरोध जारी है, क्योंकि प्रदेश सरकार की ओर से प्रबंधन और ट्रक चालकों के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से बुलाई बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। ट्रक यूनियनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि कोई निर्णय नहीं लिया गया है और वे हिमकॉन की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद सरकार दरें अधिसूचित की जाएंगी। दोनों पक्षों ने सहयोग करने का आश्वासन दिया है। सरकार ने एक उप समिति का गठन किया है। हिमकॉन ने टैरिफ तय करने की पहल की है। बैठक के परिणाम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।