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सीमेंट फैक्ट्री वाले इलाकों में फैल रही ये बीमारी
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:11 PM IST
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हिमाचल में सीमेंट फैक्ट्रियों के आसपास के इलाकों के लोग टीबी की चपेट में आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में टीबी की बीमारी का बिगड़ा रूप मल्टी ड्रग रसिस्टेंट (एमडीआर) तेजी से फैल रहा है। बढ़ते मामलों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने नेशनल ट्यूबर क्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत अर्की क्षय रोग यूनिट का चयन किया है।
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माना जा रहा है कि इस इलाके में सीमेंट उत्पादन के चलते टीबी के और ज्यादा मरीज हो सकते हैं। अर्की, कुनिहार, दाड़लाघाट, चंडी और सायरी क्षेत्र के अस्पतालों ने संबंधित क्षेत्रों में सर्वे भी शुरू कर दिया है। इसके लिए तीन यूनिटें गठित की हैं। इन इलाकों में अब तक 24 लोगों में एमडीआर की पुष्टि हो चुकी है। इन लोगों का इलाज शुरू कर दिया गया है।
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चिह्नित रोगियों के सैंपल जांच के लिए 72 घंटे के भीतर हवाई जहाज से राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र बंगलूरू भेजे जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक से इस रोग का पता लगाने के लिए औसतन 30 हजार रुपये खर्च आ रहा है। योजना के तहत टेस्ट और इलाज मुफ्त किया जा रहा है।
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क्या है एमडीआर
एमडीआर टीबी का बिगड़ा रूप है। इसमें जान का खतरा है। लक्षण टीबी रोग जैसे ही हैं। खांसी बलगम को हल्के में लेने या टीबी की दवाओं के असर न करने पर टीबी रोग एमडीआर का रूप धारण कर लेता है या दवाओं का नियमित सेवन न करने की लापरवाही से ये जानलेवा हो जाता है। दवाएं असर नहीं करतीं। टीबी में जहां छह से आठ माह दवा खानी पड़ती है, वहीं एमडीआर में 24 से 27 महीने तक दवाएं खानी पड़ती हैं।
सोलन और बिलासपुर में सीमेंट प्लांट
हिमाचल में ज्यादातर सीमेंट प्लांट सोलन और बिलासपुर जिले में हैं। इनमें सोलन के अर्की, नालागढ़, पजैहरा, जबकि बिलासपुर के बरमाणा में सीमेंट प्लांट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिरमौर के राजबण पावंटा साहिब में भी सीमेंट कारखाना है।
टीबी के लक्षण
लगातार खांसी, रोजाना शाम के समय हल्का बुखार, अचानक शरीर के वजन में भारी कमी, बलगम के साथ खून आना, शरीर में कई गांठों का होना।
सीएमओ सोलन डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि सर्वे शुरू हो चुका है। सीमेंट फैक्ट्री के कारण यहां एमडीआर के मरीज होने की आशंका है। यह सर्वे भारत सरकार एमडीआर के तहत नीति निर्धारण में प्रयोग लाएगा। जिले भर में 24 मामले सामने आ चुके हैं।