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CBI Raid: हिमाचल के रक्कड़ में सीबीआई की दबिश, खाद्य तेल कारोबारी समेत पांच पर एफआईआर

Wed, 18 May 2022 10:08 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 18 May 2022 10:08 PM IST
सार

सीबीआई ने बुधवार को एक खाद्य तेल कारोबारी के घर, दफ्तर और फैक्टरी पर छापा मारा। करोड़ों रुपये के लोन फर्जीवाडे़ में हरोली निवासी कारोबारी समेत पांच लोगों पर सीबीआई की शिमला शाखा में एफआईआर भी दर्ज की गई है। चंडीगढ़ और शिमला की टीमों ने 12 घंटे छानबीन की।

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CBI Raid in Himachal's Rakkar una, FIR on five including edible oil trader
सीबीआई - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के रक्कड़ में सीबीआई ने बुधवार को एक खाद्य तेल कारोबारी के घर, दफ्तर और फैक्टरी पर छापा मारा। करोड़ों रुपये के लोन फर्जीवाडे़ में हरोली निवासी कारोबारी समेत पांच लोगों पर सीबीआई की शिमला शाखा में एफआईआर भी दर्ज की गई है। चंडीगढ़ और शिमला की टीमों ने 12 घंटे छानबीन की। इसमें कई दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क आदि जब्त किए गए हैं।  सीबीआई ने यह कार्रवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ऊना के क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत पर की है। इसमें करीब 3.43 करोड़ के बैंक फ र्जीवाड़े का आरोप है। मैसर्ज तनिष्क एग्रो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं प्रमुख तुषार शर्मा, निदेशक श्वेता शर्मा, गारंटर निशा शर्मा और राकेश शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मिलीभगत में शामिल अज्ञात बैंक अधिकारी को भी इसमें नामजद किया गया है। आरोप है कि डेढ़ करोड़ रुपये की एक सीसी लिमिट और दो करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया गया।

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कंपनी ने इसके निदेशक और गारंटर के माध्यम से कर्ज के दस्तावेजों में गारंटी देने के गलत दस्तावेज पेश किए। कंपनी ने बैंक को बताया कि खाद्य तेलों की पैकिंग सामग्री और पेट बोतलेें बनाना उनका काम है। यह भी बताया कि इससे संबंधित उपकरण खरीदने और खाद्य तेल बनाने का काम भी शुरू किया गया है। कंपनी ने यह भी बताया कि उद्योग को स्थापित करने की बाकायदा अनुमति ली गई है। उद्योग विभाग में इस यूनिट को पंजीकृत किया गया है। बैंक से 11.70 लाख और 11.30 लाख रुपये के दो कार लोन भी लिए गए, लेकिन बाद में ये खाते एनपीए पाए गए और बैंक ने जांच शुरू की। कंपनी ने इस कर्ज को उस काम पर खर्च नहीं किया, जिसके लिए इसे लिया गया था। असल में इस कंपनी को उद्योग विभाग से कोई मंजूरी भी नहीं मिली थी। कोई भी संबंधित उपकरण भी नहीं खरीदे गए। संबंधित फंड को अन्य समूह कंपनियों को हस्तांतरित किया गया। 

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