सीबीआई बताएगी कितनी संपत्ति है धूमल के पास?
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अब बात सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रही। हिमाचल सरकार पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके परिवार की प्रॉपर्टी की जांच सीबीआई से कराने का मूड बना चुकी है। इस केस की पूरी फाइल तैयार कर ली गई है।
अफसरों ने केंद्र को संस्तुति करने के लिए फाइल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास भेज दी है। फाइल को सिर्फ मुख्यमंत्री की मंजूरी का इंतजार है। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के इनपुट के आधार पर सरकार यह कदम उठा रही है।
सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस और प्रदेश के आला अफसरों ने मिलकर धूमल और उनके परिवार की प्रॉपर्टी की जांच कराने के लिए फाइल तैयार कर दी है।
विजिलेंस भी सीबीआई के पक्ष में
वहीं, स्टेट विजिलेंस भी इस केस को सीबीआई के हवाले करना चाहती है। तर्क दिया गया है कि दूसरे राज्यों में स्टेट विजिलेंस का अपना नेटवर्क नहीं है। ऐसे में प्रॉपर्टी की जांच करना विजिलेंस के लिए बेहद मुश्किल होगा।
ऐसे में सीबीआई ही एक मात्र एजेंसी है, जो देश के विभिन्न शहरों में अपने स्तर पर विस्तार से पड़ताल कर सकती है। दो दिन पहले ही फाइल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भेजी गई है।
ऐसे में अब देखना रोचक होगा कि आखिर सरकार कब तक इस मामले की फाइल केंद्र को भेजती है। और क्या केंद्र सरकार सीबीआई से इसकी जांच करवाने को राजी होती है या नहीं।
कोई भी एजेंसी करे जांच, डर नहीं : धूमल
वहीं, प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि वह किसी जांच से नहीं डरते। चाहे कोई भी एजेंसी जांच करे। वीरभद्र सिंह जनता को बताएं कि शिमला में गेजेटियर क्यों जलाने पडे़। धूमल ने मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि वह अपने कुनबे को संभालें। नादौन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बौखलाहट में बयानबाजी कर रहे हैं।
केंद्र सरकार पर करेगा निर्भर
नियमानुसार राज्य सरकार किसी गंभीर मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र से कर सकती है। यह केंद्र पर निर्भर करेगा कि धूमल और उनके परिवार की संपत्तियों की जांच कराने की अनुमति दे या नहीं।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से जो साक्ष्य भेजे जाएंगे, उस पर पर केंद्र सीबीआई से कमेंट मांग सकता है। इसी आधार पर कदम उठाया जाएगा। केंद्र में भाजपा की सरकार है। ऐसे में राज्य सरकार हर कदम सोच समझ कर उठाएगी।
इस मामले में भी घिर गए धूमल
वहीं, पूर्व आईपीएस अधिकारी एएन शर्मा को सेवा विस्तार देने के मामले में प्रदेश की कांग्रेस सरकार पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को किसी भी सूरत में छोड़ने के मूड में नहीं है। अब स्टेट विजिलेंस अपने स्तर पर कोर्ट में धूमल के खिलाफ मुकदमा दायर करेगा।
आनन फानन में अफसरों की ओर से बुधवार को इसकी भी रूप रेखा तैयार की गई। ध्यान रहे कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी की फाइल राजभवन ने मंगलवार को वापस लौटा दी थी। इससे जहां प्रेम कुमार धूमल ने राहत की सांस ली थी, वहीं प्रदेश सरकार को भी बैकफुट पर आना पड़ा था।
हालांकि राज्यपाल के इस कदम से संभलते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों की ओर से बुधवार को धूमल के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा करने की रणनीति बनाई गई। इस पर विस्तार से चर्चा करने के बाद उक्त फैसला किया गया।
धूमल पर कोर्ट में केस दायर करेगा विजिलेंस
सूत्रों का कहना है कि अब प्रकरण में सरकार के स्तर से भी किसी प्रकार मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह तक कोर्ट में विजिलेंस की ओर से मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। इस मामले की 21 जनवरी शाम तक सरकार की ओर से विजिलेंस को फाइल नहीं भेजी गई थी।
आरोप हैं कि 2007 के विस चुनाव में एएन शर्मा नादौन क्षेत्र से भाजपा से टिकट के दावेदार थे। टिकट लेने की प्रक्रिया में उन्होंने सेवानिवृत्ति को आवेदन किया। उन्हें सेवानिवृत्ति देने की अधिसूचना को सरकार ने बाद में वापस ले लिया था। टिकट नहीं मिलने के बाद एएन शर्मा पुलिस सेवाओं में लौट आए। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद विजिलेंस ने इसे सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग बताते हुए मामला दर्ज किया।
मामले की जांच पूरी करने के बाद अब विजिलेंस ने इसमें पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व गृह सचिव और पूर्व मुख्यमंत्री पर भी मुकदमा शुरू करने की मंजूरी मांगी है।