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विधानसभा बजट सत्र: फसल बीमा योजना की नाकामी पर मंत्री ने विपक्ष के विधायकों की हां में हां मिलाई

Thu, 10 Mar 2022 07:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 10 Mar 2022 07:51 PM IST
सार

महेंद्र सिंह ने विधायकों की बात से सहमति जताते हुए कहा कि मौसम आधारित योजना का किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। कहा है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना में किसानों को प्रीमियम के बराबर भी मुआवजा नहीं मिल रहा है।

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Case of fraud with farmers in the name of crop insurance schemes raised in the himachal assembly house
फसल बीमा (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदन में मौसम आधारित फसल बीमा योजना की नाकामी पर राजस्व एवं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने विपक्ष के विधायकों की हां में हां मिलाई। महेंद्र सिंह ने विधायकों की बात से सहमति जताते हुए कहा कि मौसम आधारित योजना का किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। दिवंगत विधायक नरेंद्र बरागटा ने भी पिछली बार यह प्रश्न लगाया था। उन्होंने कहा कि विधायक जगत सिंह नेगी ने सही कहा है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना में किसानों को प्रीमियम के बराबर भी मुआवजा नहीं मिल रहा है। उन्होंने भारत सरकार को भी कहा है कि यह कैसी योजना है, इसका कैसे किसानों को लाभ होगा। 

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एक साल में मौसम की बेरुखी से 1,824 करोड़ का नुकसान
महेंद्र सिंह ने कहा कि लगभग एक साल में मौसम की बेरुखी से 1,824 करोड़ का नुकसान हुआ है। केंद्रीय दल ने भी मुआयना किया है। राहत मैनुअल को भारत सरकार की ओर से तय किया जाता है। इस बारे में केंद्र से बढ़ोतरी की मांग की गई है। उन्होंने बढ़ोतरी के सभी प्रस्ताव भी सदन में स्पष्ट किए। विधायक राकेश सिंघा इस प्रस्ताव को वापस लें। इस पर माकपा विधायक राकेश सिंघा बोले - ये प्रस्ताव केवल एकेडमिक चर्चा के लिए नहीं लाया। केंद्र को बताएं कि हम भी देश का हिस्सा हैं। राहत मैनुअल को संशोधित करें। हिमाचल सरकार इस बारे में संशोधन से अवगत करवाए। मेरे पास कोई चारा नहीं है। विरोध को वापस लेता हूं। 
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बीमा कंपनियों की धोखाधड़ी का मामला प्रमुखता से उठाया
दरअसल, प्रश्नकाल के बाद वीरवार को गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस पर बीमा कंपनियों की धोखाधड़ी का मामला प्रमुखता से उठाया गया। बागवानी क्षेत्रों के विधायकों किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह, जुब्बल-कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर, रोहड़ू के विधायक मोहन लाल और रामपुर के विधायक नंद लाल ने सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखे निशाने साधे। नयना देवी के विधायक राम लाल ठाकु र ने भी फसलों का माकूल मुआवजा नहीं देने का मामला उठाया।
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राहत मैनुअल को संशोधित करने का मामला भी उठाया
उन्होंने कहा कि टीम एक साल बाद आकर अगर रिपोर्ट दिल्ली में बना रही है तो यह सही नहीं है। इन विधायकों ने राहत मैनुअल को संशोधित करने का मामला भी उठाया। प्राकृतिक आपदा से मकानों को होने वाले नुकसान पर राहत राशि को डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने की बात की। सदन में पिछली बार गैर सरकारी सदस्य दिवस पर माकपा विधायक राकेश सिंघा के लाए गए संकल्प पर चर्चा वीरवार को भी जारी रखी।

राहत मैनुअल बाबा आदम के जमाने का
नेगी ने कहा कि राहत मैनुअल बाबा आदम के जमाने का है। बीमा योजनाओं का पैसा कंपनियों की जेब में जा रहा है। धरातल पर न तो कोई कार्यप्रणाली है और न वेदर स्टेशन हैं। जब तक जमीन पर ठीक से मूल्यांकन नहीं होगा तो बीमा के नाम पर धोखाधड़ी रुकने वाली नहीं है। किसानों का प्रीमियम के रूप में बहुत पैसा चला गया है, उस हिसाब से उन्हें राहत नहीं मिल रही है। नुकसान का जायजा लेने डबल इंजन की सरकार की एक टीम दिल्ली से आई। टीम की खातिरदारी हुई। एक साल के बाद अगर राहत दे रहे हैं, तो यह कोई राहत नहीं है। मकान बनाने के लिए कम से कम वाजिब पैसा दिया जाए। डेढ़ लाख रुपये में तो एक शौचालय भी नहीं बनता है।  


 

मंत्री सुन नहीं रहे, इनके तीन कान हैं क्या

किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी आपदा राहत के मामले में अपनी बात रख रहे थे तो उस वक्त राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी से बातचीत कर रहे थे। चौधरी उनकी बगल में बैठ गए थे।

उन्होंने तंज किया कि मंत्री गप्पें मार रहे हैं, ये सुनेंगे नहीं। जवाब इनका पहले से ही तैयार है। इस पर जब स्पीकर बोले कि ये सुन रहे हैं। इस पर जगत सिंह बोले - इनके तीन कान हैं क्या? न प्रदेश में खाद है न कुछ और है। हिमाचल के किसानों ने जीडीपी बढ़ाने में बहुत योगदान दिया है। यहां ये ऐसा कहते भी हैं। पर आप किसानों को क्या देते हैं।

परिवार रजिस्टर में हो पशुओं की एंट्री 

विधानसभा सदन में गुरुवार को गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस पर प्लास्टिक से बढ़ते प्रदूषण और उसके खाने से पशुओं की हो रही अकाल मृत्यु व बेसहारा पशुओं के लिए बनाए गए गो सदनों के रखरखाव के लिए नीति बनाने पर संकल्प पर चर्चा हुई। भाजपा विधायक रमेश धवाला की ओर से लाए गए संकल्प प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि लोग रात के समय पशुओं को छोड़ रहे हैं। प्लास्टिक कचरा खाकर पशु घूम रहे हैं और बाद में तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो रही है। पिछले 5 से 7 सालों में पशुओं को छोड़ने का प्रचलन ज्यादा बढ़ा है। सरकार को नियम लाने की जरूरत है कि जो लोग आवारा छोड़ रहे हैं, उनका नाम राशनकार्ड से हटाया जाएं ताकि इन लोगों को सस्ता राशन न मिल सके। परिवार रजिस्टर की तरह पशुओं की भी एंट्री रजिस्टर होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि कौन सा पशु मर गया है या फिर कौन का बेचा है।

विधायक आशा कुमारी ने कहा कि गो सदन संचालक मांग कर रहे हैं कि अगर रोजाना एक पशु पर सरकार 50 रुपये दे तो बेहतर तरीके से इनका पालन-पोषण होगा। महीने के 1500 रुपये मिलने चाहिए। शहरी मंत्री के साथ मिलकर ऐसी स्कीम लाए जो प्लास्टिक कचरे पर कार्रवाई कर सके। जब तक गाय दूध देती है वह हमारी है, जब नहीं देती तो सरकारी है। कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर ने कहा कि प्लास्टिक कचरा खाने से पशुओं के पेट में रसोली बन रही है। जिससे वह रात को रोते हैं और फिर उनकी मौत हो जाती है। आवारा सांड लोगों को मार रहे हैं। भाजपा विधायक जेआर कटवाल ने कहा कि आवारा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। विशाल कुमार नैहरिया, लखविंद्र सिंह राणा, सुंदर सिंह ठाकुर, हीरालाल व प्रकाश ठाकुर और बलवीर वर्मा ने भी चर्चा में भाग लिया। आगामी मानसून सत्र में पंचायतीराज मंत्री इसका जवाब देंगे। 

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