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तीन बार पलटकर घर के आंगन में गिरी कार, कॉलेज प्रवक्ता की मौत

Sun, 12 Jul 2020 07:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, जवाली (कांगड़ा)
अमर उजाला नेटवर्क, जवाली (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 12 Jul 2020 07:29 PM IST
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car accident in jwali kangra one died
- फोटो : अमर उजाला

पुलिस थाना जवाली के हवाल में कार के पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। कार सड़क से तीन बार पलटकर करीब 15 फीट नीचे गिरकर एक मकान की दीवार के साथ टकरा गई। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कार चालक को भी चोटें आई हैं। हादसे में मारे गए व्यक्ति की पहचान नरेंद्र कुमार निवासी नूरपुर के रूप में हुई है।

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नरेंद्र कुमार निवासी (ठंगर) नूरपुर अपने दोस्त मनजीत निवासी ज्वालाजी के साथ स्विफ्ट डिजायर कार (एचपी-36बी-0613) में जसूर से वाया हरसर होते हुए नैनादेवी जा रहे थे
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कि हवाल में उनकी गाड़ी एकदम से सड़क से नीचे पलट गई, जिससे कार सवार नरेंद्र कुमार बुरी तरह से जख्मी हो गया, जबकि चालक मनजीत को मामूली चोटें आई थीं।

दोनों को स्थानीय युवक अपनी गाड़ी में सिविल अस्पताल जवाली में ले गए, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने नरेंद्र कुमार को मृत घोषित कर दिया, जबकि मनजीत उपचाराधीन है। सूचना मिलते ही जवाली पुलिस अस्पताल में पहुंच गई और चालक के बयान कलमबद्ध किए। डीएसपी जवाली ओंकार चंद ने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कार को कब्जे में लेकर आगामी छानबीन शुरू कर दी है।

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चार बहनों का इकलौता भाई था नरेंद्र

जसूर के ठंगर निवासी चार बहनों के इकलौते भाई नरेंद्र की जवाली के हवाल गांव के पास कार हादसे में मौत हो गई। नरेंद्र की कार दुर्घटना से मौत के बाद गांव में सन्नाटा पसर गया। चार बहनों का इकलौता भाई नरेंद्र नूरपुर के आर्य कॉलेज में राजनीति शास्त्र का प्रवक्ता था और वह कुछ समय पूर्व ही नियमित हुआ था। नरेंद्र की एक बहन दिल्ली में विवाहित है, जबकि दो अन्य बहनों की शादी हिमाचल में ही हुई है। वहीं, उसकी सबसे छोटी बहन अभी अविवाहित थी। नरेंद्र की अभी शादी नहीं हुई थी।

पिता की सात साल पहले मौत हो चुकी है और नरेंद्र के ही कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी थी। नरेंद्र ने घर का काम लगाया था, लेकिन यह भी अधूरा रह गया। नरेंद्र की माता हृदय रोगी हैं। नरेंद्र की बहनों के आने पर ही परिवार के लोगों को यह हृदय विदारक सूचना मिली। नरेंद्र के घर उनका दोस्त कल ही आया था और आज सुबह दोनों नैना देवी जा रहे थे और बीच में ही असमय काल का शिकार हो गया। सुबह घर से नैना देवी को निकले नरेंद्र को पता नहीं था कि शाम को उसकी पार्थिव देह घर वापिस आएगी। शाम को नरेंद्र का दाह संस्कार कर दिया गया।

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