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खड़सूख रोग से खराब हुई फसल तो किसानों ने खेतों में ही चला दिया हल
Fri, 25 Jun 2021 04:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 25 Jun 2021 04:59 PM IST
सार
किसानों ने शिमला मिर्च की फसल उखाड़कर मक्की और गोभी की रोपाई का कार्य शुरू कर दिया है। सोलन जिले की बसाल, डांगरी, जौणाजी और धरोट पंचायतों में शिमला मिर्च की फसल खड़सूख रोग की चपेट में आ गई थी।
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शिमला मिर्च की फसल उखाड़कर मक्की और गोभी की रोपाई करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खड़सूख रोग की चपेट में आने से खेतों में खड़ी शिमला मिर्च की फसल बड़े पैमाने पर तबाह हो गई है। रोग पर नियंत्रण न होने के बाद किसानों ने शिमला मिर्च के खेतों में हल चला दिया है। इससे किसानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों ने शिमला मिर्च की फसल उखाड़कर मक्की और गोभी की रोपाई का कार्य शुरू कर दिया है। सोलन जिले की बसाल, डांगरी, जौणाजी और धरोट पंचायतों में शिमला मिर्च की फसल खड़सूख रोग की चपेट में आ गई थी।
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किसानों ने इस रोग पर काबू पाने के लिए बाजार में उपलब्ध सभी प्रकार की रासायनिक दवाइयों का छिड़काव भी किया, लेकिन शिमला मिर्च में लगे इस रोग से निजात नहीं मिली। इस रोग के कारण शिमला मिर्च का पौधा तने के पास से सूखना शुरू होता है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे खेत में यह रोग लग रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में प्रति वर्ष 1250 हेक्टेयर भूमि पर 18512 मीट्रिक टन शिमला मिर्च का उत्पादन किया जाता है, लेकिन इस बार अधिकतर क्षेत्रों में शिमला मिर्च की फसल तबाह हो गई है। इस कारण इस बार शिमला मिर्च की मांग अधिक रहेगी।
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नवंबर अंत तक चलने वाली फसल अधिकतर क्षेत्रों में जून में ही खत्म हो गई है, जबकि कई क्षेत्रों में अंतिम कगार पर है। क्षेत्र के किसान हरिदत्त, आदित्य, सनी, चैनसिंह, मनु, भूपेंद्र शर्मा, सुरेश, गिरीश, बृजमोहन, खेम सिंह, सुखराम, जगदीश, विशाल, जयकिशन, सूरज, नरेंद्र, अंकुश ने बताया कि खड़सूख से शिमला मिर्च की फसल तबाह हो गई है। अब शिमला के खेतों की बुआई कर अन्य सब्जियों समेत मक्की की बिजाई की जा रही है। किसानों ने कृषि विभाग ने उन्हें उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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