चीन सीमा पर बीआरओ को मिली बड़ी कामयाबी
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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने चीन तिब्बत सीमा तक क्लास-9 की तीन सड़कें पहुंचाने में सफलता हासिल कर ली है। इन सड़कों के बनने से भारत और चीन की सीमा आमने-सामने नजर आएगी। एक साल के भीतर बीआरओ की इस कामयाबी से भारतीय सेना को और मजबूती मिलेगी।
छुपन से छिपकला, कौरिक से पौंग और कौरिक से लैप्चा, इन तीनों सड़कों से चीन की पोस्ट नजर आती है। इनके निर्माण से अब सीमा तक सेना की रसद पहुंचाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
बीआरओ से मिली जानकारी के मुताबिक सीमा तक पहले कम चौड़ाई का और तंग सड़कें थी। सड़कें ऊबड़-खाबड़ होने से वाहनों को सीमा तक ले जाने में दिक्कतें पेश आती थीं।
पिछले साल से शुरू हुआ था काम
पिछले साल से बीआरओ इन सड़कों को दुरुस्त करने में लगा हुआ था। सेना को सीमा तक जाने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए बीआरओ ने इन सड़कों पर विशेष ध्यान दिया। शिमला से अधिकारियों की टीम भी समय समय पर बार्डर रोड का मुआयना करती रही है।
हालांकि पहले बीआरओ बार्डर के लिए डबल लेन बनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन सीमा से सटे इलाके में ज्यादा भीड़ नहीं है। इसलिए जाम का झंझट नहीं है। अभी सीमा तक क्लास -9 सड़कें ही पहुंचाई गई हैं।
बीआरओ के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर एसके कटारिया का कहना है कि तीन सड़कें सीमा तक पहुंचाई गईं हैं। ये सड़कें चौड़ी हैं। सेना के वाहन आराम से पार कर सकेंगे। इन सड़कों के बनने से सीमा के रिहायशी लोगों को फायदा होगा।