ब्रेन स्ट्रोक से बचना है तो अपनाएं ये उपाय
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ब्रेन स्ट्रोक (अधरंग) होते ही साढ़े चार घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाने पर उसे स्वस्थ किया जा सकता है। इसमें जरा सी देर मरीज के स्वास्थ्य पर पूरी उम्र भारी पड़ सकती है। प्रदेश में जिस भी सरकारी अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन है वहां मरीज को ले जाया जा सकता है। इन अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक में इस्तेमाल होने वाली दवा-इंजेक्शन का भरपूर स्टॉक है।
मरीज को दवा देने से पहले अस्पताल में मौजूद डाक्टर को कॉल कर न्यूरोलाजिस्ट से संपर्क कर सकते हैं। व्हाट्स अप पर मरीज की कंडीशन को भेज सकते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट फोन पर ही संबंधित डाक्टर को गाइड कर देंगे। इसका खुलासा आईजीएमसी सभागार में ब्रेन स्ट्रोक डे के मौके पर न्यूरोलॉजिस्ट एवं विभागाध्यक्ष डा. सुधीर शर्मा ने किया।
न्यूरोलॉजिस्ट डा. निशित सवल और टांडा से आए न्यूरोलॉजिस्ट डा. अमित भारद्वाज ने ब्रेन स्ट्रोक के कारणों और बचाव बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मरीज को अस्पताल में लाने में जरा भी देरी न करें। ब्रेन स्ट्रोक होने पर पल-पल कीमती है। कहा कि जिस सरकारी अस्पताल में सिटी स्कैन है वहां साढ़े चार घंटे से पहले मरीज को पहुंचा दिया जाए। एक लाख में 450 लोगों को ब्रेन स्ट्रोक आता है। यह बहुत बड़ी संख्या है। यदि ब्रेन स्ट्रोक से बचना है तो रिस्क फैक्टर से बचना होगा। ब्रेन स्ट्रोक जान नहीं लेता बल्कि विकलांगता बढ़ा देता है जो ज्यादा खतरनाक है।
प्रदेश के 21 अस्पतालों में सीटी स्कैन
प्रदेश के 21 अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन है। यहां ब्रेन स्ट्रोक को ठीक करने के लिए इंजेक्शन मुहैया करवा दिए हैं। इनकी कीमत 50 से 60 हजार के करीब है लेकिन यह मरीज को निशुल्क लगाए जाते हैं। मरीज का इस पर कोई खर्चा नहीं आता। मरीज अगर कहीं दूर दराज के क्षेत्र में है तो वह 108 एंबुलेंस की मदद से नजदीक के अस्पताल में पहुंच सकता है।
6 महीने में 14 मरीज किए दुरुस्त
आईजीएमसी अस्पताल में 5 मई 2014 को ब्रेन स्ट्रोक का पहला सफल आपरेशन किया गया था। इसके अलावा नाहन, रामपुर, सोलन, बिलासपुर में अब तक 14 मरीजों को ठीक किया जा चुका है। लेकिन यह वही मरीज हैं जो ब्रेन स्ट्रोक होने पर साढ़े चार घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच गए थे। अब इनका स्वास्थ्य फिट है।
ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित रहे आकलैंड हाउस स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संतराम सेमिनार में आए थे। इनका पहला आपरेशन हुआ था। उन्होंने बताया कि स्कूल में उसे चक्कर आया और गिर पड़ा। सिर में तेज दर्द होने लगी। हाथ पांव टेढ़े होने लगे। उन्हें तत्काल आईजीएमसी लाया गया। उपचार हुआ और 10 से 12 घंटे में वह ठीक महसूस करने लगे। छह दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अब वह पूरी तरह ठीक हैं।
इन बातों का रखें ध्यान, नहीं आएगा स्ट्रोक
-ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें।
-कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल करें।
-मोटापा शुगर को काबू रखें।
-धूम्रपान और शराब को छोड़ दें।
-जंक फूड खाना भी छोड़े
तनाव न लें, ध्यान करें
-धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें।
-नियमित रूप से व्यायाम करें।
-भार औसत से अधिक न बढ़ने दें।
-हृदय और मधुमेह के रोगी विशेष सावधानी बरतें।
-सोडियम का अधिक मात्रा में सेवन न करें।