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मौत का खेल, ब्लू व्हेल की पहेली नहीं सुलझी तो मासूम अमित ने दे दी जान

Thu, 14 Sep 2017 01:10 PM IST
अमर उजाला टीम, शिमला
अमर उजाला टीम, शिमला Updated Thu, 14 Sep 2017 01:10 PM IST
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blue whale game terror in himachal student attempt suicide
सुसाइड नोट

मासूम अमित की मौत से कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि कहीं ब्लू व्हेल की पहेली को नहीं सुलझा पाने पर उसने अपनी जान तो नहीं ले ली। अमित के लिखे सुसाइड नोट में दो पहेलियां दी हैं, जिनमें से एक को सुलझाने से संभवत: वो चूक गया। एक पहेली में एक बाक्स को 12 हिस्सों में बांटकर अंक भरे हुए हैं, जिसके नीचे उसने अपना नाम लिखा है। दूसरे बाक्स में अंग्रेजी वर्णमाला के 28 अक्षरों को बांटा गया है, जिसके नीचे लिखा है कि ये पहेली सुलझाओ।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहेलियां अमित तक कैसे पहुंची? आखिर वो कौन सी वजह है कि पहेलियां नहीं सुलझने पर मासूम खुद को मौत की सजा देने के लिए मजबूर हो गया? सुलझाने में नाकाम होने पर खुद को मार लेने के आदेश क्या गेम के संचालक ने दिए? ब्लू व्हेल की इन अनसुलझी पहेलियों का जवाब गेम के अज्ञात संचालक के पास है, जिस तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है।
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अमित के सुसाइड नोट की हर पंक्ति चौंकाने वाली है। नोट की शुरुआत में लिखा है कि,  ‘मम्मी मुझे देखना है तो स्टोर रूम जाना पर उससे पहले ये सुनो मुझे कोई प्यार नहीं करता’। इस लाइन से लगता है कि वो डिप्रेशन में चला गया था, जिसकी वजह ब्लू व्हेल की पहेलियों को माना जा रहा है। इस गेम में यह पहेलियां टास्क मानी जाती हैं, जिन्हें सुलझा कर गेम एडमिन को भेजना होता है। 
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अमित ने नोट में पहले लिखा ‘आपका’, फिर उसे काट कर लिखा- मैं अमित मरने जा रहा हूं। इसके बाद लिखा है, ‘ये सजा नहीं है नस काटनी, वगैरा वगैरा’। हैरान करने वाली अंतिम लाइन में लिखा है ‘मैं अपने को फांसी की सजा देता हूं।’ अमित ने खुद को क्यों सजा दी इसकी वजह शायद नोट के अंत में बनाई दो पहेलियां हैं। इन्हें बूझ पाने में नाकाम रहने पर क्या उसने खुद को सजा दे दी, यह जांच का विषय है।

क्या  है इन दो पहेलियों का रहस्य
- पहली पहेली में एक बाक्स है, जिसे तीन लाइनों में 12 हिस्सों में विभाजित किया है। हर बाक्स में अंक लिखे हैं। पहली लाइन में 1 से 4 तक, निचली लाइन में 5 से 8 तक और आखिरी लाइन में 9 और 10 के साथ आखिरी दो बाक्स में स्टार और प्लस का निशान है। यह काफी कुछ टेलीफोन के डायल बॉक्स की तरह है, लेकिन 0 की जगह इसमें 10 का अंक है। इस बाक्स के नीचे मैं अमित लिखा है।
- ठीक उसके सामने एक और बॉक्स है, जिकी चार लाइनों को 28 हिस्सों में विभाजित किया है। अंग्रेजी की वर्णमाला के कुछ अक्षर इस्तेमाल किए हैं। हर लाइन में दो बार ए अक्षर का इस्तेमाल है। इसके अलावा 13 और अक्षर हर हिस्से में लिखे गए हैं। इनको सुलझाने की चुनौती थी, जिसके चलते उसके नीचे अमित ने लिखा है ये पहेली सुलझाओ। अब इन अक्षरों से हर लाइन में कोई शब्द बनाना था या फिर वाक्य यह समझ से परे है।


एडमिन तक पहुंचना नामुमकिन
इन पहेलियों का क्या अर्थ है, यह जांच का सबसे बड़ा विषय है। इनको विशेषज्ञों की मदद से डिकोड करने की अगर कोशिश करने पर अहम सुराग हाथ लग सकते हैं। पुलिस भी इस तथ्य को गंभीरता से ले रही है। हालांकि पहेलियां भेजने वाले ने उसके साथ क्या दिशा निर्देश दिए हैं, उसका जिक्र साफ तौर पर नहीं किया गया है। इससे पहले किस तरह की पहेलियां अमित ने सुलझाई उनको भी तलाशना जरूरी है, जिससे पूरे खेल के तार जुड़े हो सकते हैं।

देश में इस खूनी खेल के कई मामले 

blue whale game terror in himachal student attempt suicide

26 जुलाई 2017 - केरल के तिरुवनंतपुरम में 16 वर्षीय बच्चे की मौत
30 जुलाई 2017 - मुंबई के अंधेरी ईस्ट में 14 वर्षीय बच्चे ने इमारत के पांचवे माले से कूदकर जान दी
12 अगस्त 2017 - पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में दसवीं के छात्र ने रस्सी से आना गला घोंट कर जान दे दी
16 अगस्त 2017 - केरल में 22 वर्षीय युवक की फंदा लगाकर मौत
27 अगस्त 2017 - उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में तेरह वर्षीय छठी के छात्र ने फंदा लगा कर दी जान
30 अगस्त 2017 - तमिलनाड़ू के मदुरै में 19 वर्षीय कॉलेज छात्र ने फंदा लगाकर जान दे दी।
3 सितंबर 2017 - मध्यप्रदेश के दामोह में ग्यारहवीं के छात्र सात्विक ने चलती ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी।

आत्महत्या के रोके गए प्रयास
10 अगस्त 2017 - मध्य प्रदेश के इंदौर में सातवीं के छात्र को इमारत के तीसरे माले से कूदते समय बचा लिया।
10 अगस्त 2017 - पुणे में चौदह वर्षीय छात्र को महाराष्ट्र पुलिस ऐन मौके पर बचाया

क्या करें मां बाप 

blue whale game terror in himachal student attempt suicide

इस गेम में ज्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे फंस रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं। चेक करें कि बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है। इलेक्ट्रानिक गैजेट के इस्तेमाल को चेक करें। बच्चा अकेला, गुमसुम रहता है या अचानक खुद को कमरे में बंद कर लेता है तो उसके साथ बैठकर बात करें। देखें कि कहीं बच्चा मोबाइल छत या बंद कमरे में जाकर तो यूज नहीं कर रहा। अचानक व्यवहार बदलता है तो काउंसलर या मनोचिकित्सक की मदद लें। माता पिता समय निकालें तो बच्चों को इससे बचाया जा सकता है। -डॉ. रवि शर्मा, मनोचिकित्सक, आईजीएमसी

क्या हैं लक्षण
- बहुत गुस्सा करना
- चिड़चिड़ा रहना
- ज्यादा मूड स्विंग्स होना
- कमरे में बंद रहना
- खाना छोड़ देना
- देर रात तक जागना
- गुमसुम रहना
- बहुत जिद करना
- हिंसक हो जाना
- पढ़ाई से मन चुराना

अभिभावक बरतें ये सावधानी
- बच्चों के दोस्त बनें, उनकी जिंदगी का हिस्सा बनें
-  छोटी-छोटी बात पर न टोकें। मन की बात जानने की कोशिश करें।
- बातचीत के अंदाज में बच्चों से पूछताछ करते रहें। 
- उनके फैसलों का सम्मान करें। उनके डर को सुनें और उससे निकलने में उनकी मदद करें।
- देखें कि बच्चा इंटरनेट कौन सी गेम कितने समय तक देख रहा है।
- बच्चे के लिए गैजट इस्तेमाल करने का टाइम तय करें।
-  गलत साइट को तुरंत बंद कर दें या डिलिट कर दें।
-  खुद भी मोबाइल, इंटरनेट, टीवी आदि पर ज्यादा वक्त न बिताएं।

स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश 

blue whale game terror in himachal student attempt suicide

शिमला। सूबे में ब्लू व्हेल गेम से सुसाइड संबंधी मामले बढ़ते देख डीजीपी सोमेश गोयल ने सभी जिलों के एसपी को स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे तमाम पुलिस अधीक्षकों को इस बारे में पत्र भी लिख रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि इस तरह के अपराधों और हादसों से बचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

डीजीपी बोले कि ऐसी घटनाओं को लेकर अगर अभिभावक शिकायत करें तो मामलों पर कानूनन कार्रवाई हो सकती है। ब्लू व्हेल गेम तैयार करने वाला अपराधी पहले ही रूस में पकड़ा जा चुका है। अब अलग-अलग सर्वर से इस खेल को डाउनलोड किया जा रहा है। उसी से बच्चे गेम खेल रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षकों सतर्क रहना होगा।

ब्लू व्हेल के सामने पुलिस ने डाले हथियार

blue whale game terror in himachal student attempt suicide

ब्लू व्हेल के सामने पुलिस ने हथियार डाल दिए हैं। हैरत की बात है कि बयान आने के बाद भी इस जानलेवा चक्रव्यूह में फंसे सोलन शहर के चारों बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस का कहना है कि हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है। जबकि पुलिस को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर पूछताछ करनी चाहिए ताकि इस खूनी खेल में फंसे बच्चों को वक्त रहते बचाया जा सके और उनके मां बाप को अलर्ट किया जा सके।  


करीब एक सप्ताह गुजर जाने के बावजूद न तो पुलिस और न ही कोई सामाजसेवी संस्था इन बच्चों को काउंसलिंग देने पहुंच सकी है। यह बच्चे अभी भी अपने घरों में हैं। जिस बच्चे को गेम खेलते पाया गया था उसने ही अपने चार अन्य दोस्तों के नाम मीडिया को बताए थे। यह सभी एक ग्रुप में साइबर कैफे जाकर गेम खेल रहे थे। बच्चे ने खुलासा किया था कि सभी एक ही स्कूल के हैं।


लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अभी तक किसी भी मनोरोग विशेषज्ञ या पुलिस के आईटी सेल को बुलाना जरूरी नहीं समझा है। उल्टा स्कूल प्राचार्य ने इन बच्चों के स्कूल से संबंध होने से ही इनकार कर दिया था। बच्चों की सुरक्षा का राग अलापने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं इस मुद्दे पर चुप हैं वहीं पुलिस अभी भी ब्लू व्हेल मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत का इंतजार कर रही है। बहरहाल स्कूल प्रबंधन, पुलिस और समाजसेवी संस्थाएं बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं।


काउंसलिंग को तैयार हैं : एसपी  
पुलिस अधीक्षक मोहित चावला का कहना है कि पुलिस की टीम काउंसलिंग करने को तैयार है। लेकिन स्कूल प्रबंधन की तरफ से कोई मांग नहीं की जा रही है। अपने स्तर पर शहर के सभी साइबर कैफे जांचे गए हैं। संचालकों को 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। साइबर कैफे आने वाले बच्चों का पंजीकरण और कारण पूछने को भी कहा गया है।  

शिक्षा विभाग को दिए हैं निर्देश : उपायुक्त 
सोलन उपायुक्त राकेश कंवर का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूल प्रबंधकों को जागरूक करने के लिए कहा गया है। बच्चों और अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सख्त कदम भी उठाए जाएंगे।

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