NH के बीच की बस्तियां बनी हादसों के ब्लैक स्पॉट, आंकड़ों में हुआ खुलासा
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प्रदेश के नेशनल हाईवे के किनारे बसी बस्तियां हादसों के नए ब्लैक स्पॉट बन गई हैं। प्रदेश पुलिस की ओर से शुरू किए गए रोड एक्सीडेंट डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (आरएडीएमएस) के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। अध्ययन से पता चला कि राजधानी से सटे ठियोग, रामपुर और बालूगंज में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं।
इन हादसों में सबसे ज्यादा हादसे वाहनों के आमने-सामने से टकराने के हो रहे हैं। अब ट्रैफिक, टूरिस्ट एंड रेलवे विभाग यातायात नियंत्रण को लेकर नई रणनीति तैयार कर रहा है। सड़क हादसों की निगरानी और कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने एक सिस्टम तैयार किया।
इससे मिले आंकड़ों ने पुलिस को चौंका दिया है। पिछले एक साल में जिला शिमला से सटे ठियोग, बालूगंज और रामपुर में सड़क हादसों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है।
आरएडीएमएस के डाटा में इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नेशनल हाईवे होना माना जा रहा है। इन आंकड़ों पर अध्ययन कर रही डीआईजी टीटीआर पुनीता भारद्वाज कहती हैं कि नेशनल हाईवे पर आम तौर पर वाहन लंबी दूरी से आ रहे होते हैं।
एक ही रफ्तार पर वाहन चलाने की वजह से कोई बस्ती या आबादी वाला क्षेत्र आने पर ड्राइवर की मनोवैज्ञानिक स्थिति पहले जैसी ही रहती है। इसी वजह से वाहन चालक बस्तियों के बीच भी वाहन तेजी से ही चलाते हैं और आमने-सामने की टक्कर के मामले ज्यादा सामने आते हैं।
बाईपास व्यवस्था को देना होगा बढ़ावा- डीआईजी पुनीता कहती हैं कि नेशनल हाईवे किनारे से बस्तियों को हटाना असंभव है। ऐसे में बाईपास बनाने की ओर ज्यादा जोर देना चाहिए। इससे तेज रफ्तार से चल रहे वाहनों को आबादी के बीच से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। वहीं, रोजाना आवागमन करने वाले स्थानीय वाहन ज्यादा रफ्तार से नहीं चलते हैं। ऐसे में हादसों में कमी आने की संभावना रहती है।