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रिटेंशन पॉलिसी पर बढ़ा विरोध, अब भाजपा ने खोला मोर्चा

Fri, 08 Jul 2016 12:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 08 Jul 2016 12:40 PM IST
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bjp verbal attack over retention policy
विधायक सुरेश भारद्वाज प्रेसवार्ता करते हुए। - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा ऐसे भवन हैं जिन्हें नियमित किया जाना है। अध्यादेश आए हुए 22 दिन का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक महज करीब 138 आवेदन ही आए हैं।  प्रदेश सरकार ने यह अध्यादेश केवल बिल्डर लॉबी को खुश करने के लिए लाया है। यह आरोप शिमला शहर के विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रेसवार्ता के दौरान लगाया।

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भारद्वाज ने कहा कि आम जनता को इससे कोई राहत नहीं मिल रही है। इस अध्यादेश का फायदा केवल खास को ही मिलेगा । उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने इस कार्यकाल के दौरान दूसरी बार ये अध्यादेश लाई है। पहले जो अध्यादेश लाया गया था उसे विरोध के बाद विड्रो कर लिया गया। उसके बाद विधानसभा में इसे लाने की तैयारी थी लेकिन इसे पेश नहीं किया जा सका। कैबिनेट में इसे मंजूर कर लागू कर दिया गया है।
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सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यदि सरकार कानून का अध्ययन करती और उसके बाद लोगों से सुझाव मांग कर सही तरीके से विधानसभा में इसे पेश किया जाता तो अच्छा होता। बार बार इसे लाकर और फिर विड्रो कर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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टीसीपी अध्यादेश में एज इटिज वेयर इटिज के आधार पर भवनों को नियमित करने की बात कही गई है लेकिन इसमें 30 फीसदी सेट बैक की शर्त लगाई गई है। भवन नियमित करने के लिए फीस इतनी ज्यादा है कि आम जनता को इसे चुकाना मुश्किल है। विधायक ने कहा कि एज इटिज वेयर इटिज नाम केवल आम जनता को गुमराह करने के लिए है।

भवन की कीमत से ज्यादा लग जाएगी फीस: गणेश दत्त

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भाजपा के उपाध्यक्ष गणेश

न्यू मर्ज एरिया में लोगों ने भवन तब बनाए थे जब वह पंचायतों के अधीन आते थे। उस समय सेट बैक की शर्त नहीं थी ऐसे में अब उन पर ये शर्त लगाना तर्कसंगत नहीं है।  विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि भवन अवैध रूप से नहीं बने हैं। लोगों ने पंचायत में रहते हुए इन्हें बनाया है।

लोगों ने बैंकों से कर्ज लेकर मकान बनाए हैं। विभाग की ओर से इन्हें  बिजली और पानी के कनेक्शन दिए गए हैं। जब इन भवनों का निर्माण हुआ उस लोगों को जागरूक करने का काम टीसीपी का था  उस समय टीसीपी विभाग के अधिकारी कहां सोए हुए थे।

अधिकारी दफ्तरों में बैठकर पॉलिसी बना देते हैं। जमीनी हकीकत से अंजान है। उन्होंने कहा कि टीसीपी एक्ट में संशोधन किया जा रहा था उस समय लोगों के सुझाव क्यों नहीं लिए गए।

भाजपा के उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा कि सरकार ने जब यह अध्यादेश लाया था उसी समय उन्होंने कहा था कि यह आम जनता के हित में नहीं है। इसमें भवन की कीमत से ज्यादा फीस लग जाएगी। इस स्थिति में जिन लोगों ने बैंकों से कर्ज लेकर मकान बनाए हैं वह लाखों की भारी भरकम फीस कहां से चुका पाऐंगे।

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