जीएसटी पर सियासी मोर्चाबंदी, भाजपा को सता रहा गिरती अर्थव्यवस्था का डर
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गिरती अर्थव्यवस्था को कांग्रेस नोटबंदी और जीएसटी से जोड़कर भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रही है। अर्थव्यवस्था के फ्रंट पर घिरी भाजपा को मुद्दा गर्माने का डर सता रहा है।
पार्टी के चुनावी रणनीतिकार जीएसटी में संशोधन को टैक्स प्रणाली लागू से भी बड़ा फैसला साबित करने में जुटे हैं। टैक्स प्रणाली में बदलाव को दिवाली का बड़ा तोहफा बताया जा रहा है। वीरभद्र सरकार से हिसाब मांग रही भाजपा नोटबंदी, कालाधन और जीएसटी पर कांग्रेस को सफाई देने को मजबूर है।
भाजपा जहां भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जा रही है, वहीं कांग्रेस ने जीडीपी में गिरावट को महंगाई से जोड़ मतदाता की कमजोर नब्ज पर हाथ रखा है। जीएसटी को लेकर तेज होते विरोधी सुर अगर भाजपा शांत नहीं कर पाई तो उसका असर चुनाव में दिखेगा।
मंडी में राहुल गांधी की रैली से यह साफ है कि प्रदेश भाजपा को कोसने की जगह पार्टी मोदी सरकार को निशाने पर रखेगी। भ्रष्टाचार पर भाजपा के हमले का जवाब अर्थव्यवस्था में गिरावट से दिया जाना है। कांग्रेस मुद्दे को आम आदमी से जोड़कर पेश करने में जुटी है, जो भाजपा नेतृत्व की बड़ी चिंता है।
महंगाई बढ़ने के कांग्रेसी दावे की हवा निकालने के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने कसरत तेज कर दी है। जीएसटी में संशोधन का असर जल्द से जल्द आम आदमी को महसूस हो, इसके लिए मुहिम तेज हो गई है।
केंद्र सरकार अपने स्तर पर राज्यों को संशोधन और जागरूकता तेज करने को कह चुकी है जबकि भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को व्यापारी वर्ग को जागरूक करने के लिए प्रचार चलाने को कहा है। भाजपा ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी जीएसटी को लेकर फैल रही भ्रांतियों से निपटने के लिए अपने आईटी सेल को सक्रिय कर दिया है।
ट्वीट और फेसबुक पोस्ट से टैक्स प्रणाली में संशोधन के बाद के लाभ गिनाए जा रहे हैं। आचार संहिता के बाद होने वाले स्टार प्रचार में भी पार्टी केंद्रीय नेताओं को जीएसटी, नोटबंदी और कालाधन के मुद्दे को पार पाने के टिप्स देकर भेजा जाएगा।
कांग्रेस को पता होना चाहिए कि यह वही जीएसटी है, जिसे उनकी सरकार पास नहीं करवा पाई। पीएम मोदी ने इसे लागू कर दिया है, जिससे देश को एक टैक्स प्रणाली की बेहतरीन सुविधा मिली। नई टैक्स प्रणाली लागू होने से कुछ दिक्कतें आती हैं, जिन्हें लगातार सुधारा जा रहा है। गरीब आदमी पर महंगाई की कोई मार नहीं पड़ी है। भ्रष्टाचार में घिरी कांग्रेस तर्कहीन आरोप लगा रही है। -सतपाल सिंह सत्ती, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
महंगाई और बेरोजगारी के हथियार से भाजपा पर वार करेगी प्रदेश कांग्रेस
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों के हथियार से ही भाजपा पर कडे़ वार करेगी। कांग्रेस के प्रादेशिक नेताओं ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से इस घेराबंदी के लिए जीएसटी और नोटबंदी जैसे फैसलों को गलत करार देता हुआ मंत्र ले लिया है।
कांग्रेस संगठन सातवीं बार के मुख्यमंत्री घोषित हो चुके सीएम वीरभद्र सिंह से इसके लिए टिप्स भी लेगा। लोगों के घर-द्वार और बूथ स्तर तक पहुंचकर भाजपा को तमाम मुद्दों पर भारी पड़ते पब्लिक की इन समस्याओं के अस्त्र से करारा हमला बोला जाएगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान इस रणनीति की पुष्टि करते हैं।
बेशक भाजपा सीएम वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में चुनाव प्रचार कर रही कांग्रेस को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। बावजूद इसके कांग्रेस ने ये तय कर लिया है कि हिमाचल के लोगों के लिए भ्रष्टाचार से भी बड़ा मुद्दा महंगाई और बेरोजगारी का सामना करना हो गया है।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान का कहना है कि कांग्रेस लोगों से ही सवाल करती है कि मोदी सरकार या मोदी की तथाकथित हवा ने उन्हें दिया क्या है? महंगाई, बेरोजगारी और झूठे वादों के अलावा देश की तमाम जनता की तरह हिमाचल के लोगों को कुछ भी तो नहीं मिला है।
पेट्रोल, डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं। सब्जियों, फलों और अन्न के दामों में भी अनियंत्रित बढ़ोतरी हो रही है। आम जनता पर जीएसटी थोपे जाने से हर चीज महंगी होती जा रही है। प्रदेश कांग्रेस सरकार ने सीमित साधनों के बावजूद आम आदमी को राहत देने के प्रयास किए हैं।
इनमें लोगों को रियायती खाद्यान्न से लेकर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर देना शामिल हैं। खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी के फोकस में रहे गुजरात के मॉडल से बेहतरीन मॉडल हिमाचल का विकास मॉडल आंका है।
कांग्रेस जनता के बीच इन्हीं तमाम मुद्दों को लेकर पहुंचेगी। कांग्रेस का जनता से संपर्क का ये अभियान सोशल मीडिया से लेकर जनता के घर द्वार तक जारी रहेगा।