अपने ही मंत्री के खिलाफ जांच पर उलझी प्रदेश सरकार
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जयराम सरकार के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने भाजपा चार्जशीट पर प्रदेश सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। शर्मा पिछली सरकार के दौरान वीरभद्र मंत्रिमंडल में पंचायती राज व पशुपालन मंत्री थे।
वीरभद्र सरकार के मंत्री के तौर पर भाजपा ने राज्यपाल को सौंपी चार्जशीट में उन पर दवाई खरीद घोटाले में भागीदार होने का आरोप लगाया था। इसके अलावा शर्मा के खिलाफ बेनामी संपत्ति होने का भी आरोप लगाया था। चूंकि शर्मा वर्तमान सरकार में भी मंत्री हैं, ऐसे में अब भाजपा सरकार के लिए मुसीबत बन गई है कि वह क्या करे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि वह चार्जशीट के अपने अपने विभागों से संबंधित आरोपों की जांच कर टिप्पणी भेजे। हाल ही में मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने भी सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक कर टिप्पणी भेजने के सख्त निर्देश दिए थे।
डेढ़ दर्जन से ज्यादा विभागों ने अपनी टिप्पणियां भेज दीं, लेकिन राजस्व और पशुपालन विभाग ने टिप्पणी नहीं भेजी। सूत्रों की मानें तो दोनों विभागों को यह नहीं समझ आ रहा है कि वह क्या करें।
दरअसल, अगर विभाग आरोपों से संबंधित दस्तावेज भेजते हैं तो विजिलेंस उनकी जांच करेगी और इससे सरकार की किरकिरी हो सकती है। यही वजह है कि अनिल शर्मा पर लगे आरोपों ने विजिलेंस की जांच को उलझा दिया है।