Bilaspur News: जिला परिषद की कुर्सी बनी अखाड़ा, अध्यक्ष ने फिर वापस लिया इस्तीफा
जिला परिषद बिलासपुर की अध्यक्ष मुस्कान के खिलाफ तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। जिला परिषद के 10 सदस्यों ने उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस पर चर्चा के लिए 12 जुलाई का दिन निर्धारित किया गया है।
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बिलासपुर में जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी वर्तमान में अहम की लड़ाई का अखाड़ा बनकर रह गई है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद बिलासपुर में जिला परिषद की सत्ता परिवर्तन के लिए भी लड़ाई शुरू हो गई थी। उपाध्यक्ष की कुर्सी में तो फेरबदल हुए, लेकिन अध्यक्ष की कुर्सी की लड़ाई तीन माह से खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। धार-टटोह वार्ड से लोगों ने प्रदेश की सबसे युवा सदस्य को चुनकर सत्ता में भेजा, ताकि वे लोगों की समस्याओं को समझे और जनहित के लिए कार्य करे।
निर्दलीय जीतने के बाद मुस्कान ने अध्यक्ष पद पर तैनात होने की शर्त पर भाजपा का दामन थामा था और प्रदेश की सबसे युवा जिला परिषद अध्यक्ष बनी थीं। दो साल के कार्यकाल के बाद मार्च 15 को अन्य सदस्यों ने मुस्कान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की। इससे पहले की जिप सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पारित करते मुस्कान ने इस्तीफा दे दिया। वहीं फिर एक माह का समय पूरा होने से एक दिन पहले अपना इस्तीफा वापस लेकर जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
इसके बाद फिर से दूसरी बार सदस्यों ने जब अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की तो उन्होंने फिर से इस्तीफा दे दिया। अब लगातार दूसरी बार समय अवधि पूरी होने से पहले ही अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। कुर्सी बचाने के लिए लगातार इस्तीफे का दांव खेला जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि युवा जिला अध्यक्ष अपने हित के लिए जनता के हित को दाव पर लगा रही हैं।
जहां जनता की समस्याओं के समाधान का कार्यभार इन पर है, वहीं इनकी प्राथमिकता कुर्सी की लड़ाई हो गई है। भाजपा समर्थित पूर्व उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर ने अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया था। मतदान में वह हार गए और अब बतौर जिप सदस्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन जिप अध्यक्ष कुर्सी को बचाने के लिए इस्तीफा-इस्तीफा खेल रही हैं।
जहां लोगों के हितों के लिए आवाज उठनी थी वहां पर सत्ता में बने रहने का खेल हावी हो रहा है। अब एक माह का समय पूरा होने से करीब तीन दिन पहले ही मुस्कान ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है, जबकि अन्य सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। देखना यह है कि वो अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगी या एक बार फिर इस्तीफे का दाव खेलेंगी।
जो अधिकार मिले हैं उनका कर रही हूं उपयोग
मैं मुझे जो अधिकार मिले हैं उनका उपयोग कर रही हूं। अन्य सदस्यों को अगर मुझसे कोई समस्या थी तो उन्हें आमने-सामने बैठकर मुझसे बात करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब मैं भी अपने अधिकारों का उपयोग कर रही हूं। - मुस्कान, जिप अध्यक्ष बिलासपुर
पंचायतीराज एक्ट में हैं कुछ खामियां
पंचायतीराज एक्ट में कुछ खामियां हैं, जिसका फायदा जिप अध्यक्ष की ओर से उठाया जा रहा है। विभाग इसका रिव्यू कर रहा है। जल्द इसका समाधान निकाला जाएगा। -अनिरुद्ध सिंह, पंचायतीराज मंत्री
जिला परिषद अध्यक्ष ने एक बार फिर से इस्तीफा वापस ले लिया है। घटनाक्रम पर निदेशालय में बात कर आगामी कार्रवाई की जाएगी। -अश्वनी शर्मा, जिला पंचायत अधिकारी, बिलासपुर
अध्यक्ष के खिलाफ तीसरी बार लाया गया अविश्वास प्रस्ताव
जिला परिषद बिलासपुर की अध्यक्ष मुस्कान के खिलाफ तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। जिला परिषद के 10 सदस्यों ने बुधवार को उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस पर चर्चा के लिए 12 जुलाई का दिन निर्धारित किया गया है। हालांकि माना जा रहा कि अध्यक्ष मुस्कान एक बार फिर चर्चा से पहले इस्तीफा देकर एक माह तक अपनी कुर्सी बचा सकती हैं। बुधवार को प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव पर 14 सदस्यों में से 10 सदस्य ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें मदन धीमान, आईडी शर्मा, विमला देवी, बेली राम टैगोर, शालू रनौत, प्रोमिला बसु, राजकुमार, शैलजा शर्मा, मान सिंह और पूजा रानी शामिल हैं।
गौरव शर्मा, सत्या देवी और प्रेम सिंह ठाकुर ने प्रस्ताव से दूरी बनाई रखी है। बता दें कि जिला परिषद की अध्यक्ष मुस्कान और पूर्व उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर के खिलाफ पहली बार मार्च में अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। चर्चा के लिए 27 मार्च को बैठक रखी गई। बैठक से एक घंटे पहले दोनों पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा एक माह तक पंचायतीराज निदेशक के पास विचाराधीन रहा। इसी अवधि के दौरान दोनों पदाधिकारी नियमानुसार इस्तीफा वापस ले सकते थे।
इसी नियम का फायदा उठाकर दोनों पदाधिकारियों ने समय अवधि खत्म होने से एक दिन पहले इस्तीफा वापस ले लिया। 19 मई को दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की गई। एक जून को चर्चा का दिन निर्धारित हुआ। इसी बीच प्रस्ताव के खिलाफ अध्यक्ष मुस्कान ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 31 मई को मुस्कान ने अदालत से याचिका वापस ले ली और उसी दिन इस्तीफा दे दिया, जबकि एक जून को हुई बैठक में उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर ने अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया, जिसमें उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी।
इसके बाद 17 जून को नए उपाध्यक्ष के चुनाव हुए, जिसमें मान सिंह धीमान उपाध्यक्ष बने, लेकिन अध्यक्ष मुस्कान विभागीय नियम खामी का फायदा उठाकर अभी तक कुर्सी बचाने में कामयाब रही हैं। वहीं, अब माना जा रहा कि इसी खामी का फायदा मुस्कान एक बार फिर उठा सकती हैं और 12 जुलाई से पहले इस्तीफा देकर एक माह कुर्सी बचा सकती हैं। जिला पंचायत अधिकारी अश्वनी शर्मा ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 12 जुलाई का दिन निर्धारित किया गया है।
जिला परिषद की बैठक में गरमाए सड़क-पानी, बिजली और बस रूट के मुद्दे
जिला परिषद की बैठक अध्यक्ष मुस्कान कुमारी की अध्यक्षता में हुई। सड़क, पानी, बिजली और बस रूट के मुद्दे छाए रहे। विभागीय अधिकारियों के उपस्थित नहीं होने और बिना दस्तावेजों के पहुंचने पर नाराजगी जाहिर जताई गई। बैठक में जिला परिषद सदस्य प्रोमिला बसु ने झंडूता मंडल के लोक निर्माण विभाग के किसी अधिकारी के भाग न लेने पर रोष व्यक्त किया। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला उपायुक्त डॉ. निधि पटेल, जिला पंचायतीराज अधिकारी अश्वनी शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अतिरिक्त उपायुक्त ने अधिकारियों को बैठक में भाग लेकर लोगों की समस्याओं को हल करने में सहयोग की अपील की। जिला परिषद सदस्य प्रेम सिंह ठाकुर ने बिजली की आंख मिचौनी का मुदा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में आए दिन बिजली गुल रहती है। लोग नियमित बिजली चाहते हैं ताकि उन्हें गर्मी में राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त उन्होंने उनके क्षेत्र से शिमला जाने वाली तीन बसों के रूट बंद होने का मामला भी उठाया।
उन्होंने बताया कि शिमला-धर्मशाला वाया नवगांव बस, निचार-मंडी और शिमला-तल्याणा बसों के रूट बंद कर दिए गए हैं। वाया नवगांव शिमला के लिए 10 बजे के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम की कोई बस नहीं है। लोगों को शिमला जाने के लिए जुखाला आना पड़ता है। बैठक में जल शक्ति विभाग में आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों को वेतन की अदायगी न होने का मामला भी उठा।