Bilaspur Bus Accident: बस की सीट के नीचे से भाई-बहन परिजनों को लगा रहे थे आवाज, ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाले
भल्लू पुल पर बस हादसे के बाद जोरदार धमाके से पूरा क्षेत्र हिल गया। यह इतना जोरदार था कि आसपास के घरों में बर्तन गिर गए और कुछ मकानों के कांच तक टूट गए।
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बरठीं के नजदीक भल्लू पुल पर बस हादसे के बाद जोरदार धमाके से पूरा क्षेत्र हिल गया। यह इतना जोरदार था कि आसपास के घरों में बर्तन गिर गए और कुछ मकानों के कांच तक टूट गए। लोगों ने सोचा जैसे कोई भूकंप आया हो। सबसे पहले भल्लू गांव के हनी पटियाल, लखबीर, विवेक, हनी पटियाल के पास काम करने वाले देव और निखिल घटनास्थल की ओर दौड़े। वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि सड़क पर भारी मलबा जमा है और उसके भीतर बस का पिछला हिस्सा ही नजर आ रहा था।
उन्होंने तुरंत आसपास के अन्य ग्रामीणों को फोन किया। कुछ ही मिनटों में सैकड़ों लोग मौके पर जुट गए। बस पूरी तरह मलबे में दबी हुई थी, लेकिन भीतर से बच्चों की चीखें सुनाई दे रही थीं। कुछ ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए बस के दरवाजे के हिस्से से रास्ता बनाकर अंदर झांका और वहां दो छोटे बच्चे शौर्य और आरुषि जिंदा मिले। दोनों भाई-बहन सहमे हुए थे। शौर्य अपनी मां को पुकार रहा था और आयुषी लगातार पापा… पापा… चिल्ला रही थी।
रात भर चला रेस्क्यू,एक-एक कर निकले शव
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। रात भर राहत कार्य चलता रहा। हर चट्टान के नीचे से किसी न किसी यात्री का शव मिल रहा था। करीब आधी रात तक बस का अधिकांश हिस्सा बाहर निकाला जा चुका था, लेकिन राहत कार्य बुधवार सुबह तक जारी रहा।
ग्रामीणों ने दिखाई मानवता की मिसाल
स्थानीय लोगों ने राहत कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर प्रशासन की मदद की। वे पूरी रात मौके पर डटे रहे। उन्होंने एनडीआरएफ और पुलिस कर्मियों के लिए भोजन, पानी और चाय तक की व्यवस्था की। कई लोग अपने घरों से टॉर्च, कंबल और उपकरण लेकर पहुंचे ताकि अंधेरे में बचाव कार्य में मदद मिल सके।