कालका-शिमला फोरलेन पर बड़ा फैसला, जरूर पढ़ें
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एनएच 22 कालका- शिमला फोरलेन बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। परवाणू शिमला फोरलेन के सोलन वन मंडल को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने फोरेस्ट क्लीयरेंस दे दी है। इस निर्माण में करीब 21,585 छोटे-बड़े पेड़ कटेंगे।
परवाणू से शोघी तक करीब 65.50 हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण नेशनल हाईवे अथॉरिटी करेगी। 67 किलोमीटर लंबे फोरलेन से चंडीगढ़ से शिमला की दूरी 17 किमी कम होगी। इस मंजूरी के तहत एनएचएआई से करीब 19 करोड़ रुपये जमा करवाने के लिए कहा है, जिसमें तीन शर्तें रखी गई हैं।
इसकी पुष्टि डीएफओ सोलन प्रेम महाजन ने की है। उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर को सूचना मिल चुकी है।
ये पूरी होनी है औपचारिकताएं
डीएफओ ने कहा कि पैसा जमा होने के बाद भारत सरकार की स्टेज 01 की कंडीशन को पूरा किया जाएगा। इन शर्तों को भारत सरकार के पास स्टेज टू यानी फाइनल मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
फोरलेन निर्माण में पर्यावरण दूषित होने की प्रतिपूर्ति के लिए एनपीवी नेट प्रेजेंट वेल्यू के तहत 6.15 करोड़ की राशि एनएचएआई को जमा करवानी होगी, जिससे प्रदूषण के प्रभाव को कम करके पर्यावरण को बेहतर बनाने के कार्य होंगे।
जमीन पर दोगुना होगा पौधरोपण
65.50 हेक्टेयर में होने वाले भूमि अधिग्रहण के लिए वन मंत्रालय ने डबल हेक्टेयर भूमि पौधरोपण करने की शर्त भी रखी है। जिसमें 131 हेक्टेयर भूमि में विभाग पौधरोपण करेगा। इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। इसके लिए एनएचएआई को 3.02 करोड़ की राशि जमा करवाएगा।
2730 करोड़ की डीपीआर तैयार
परवाणू शिमला एनएच का कार्य 2015 तक प्रस्तावित है। इसमें निजी भूमि में थ्रीडी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। केंद्र सरकार से जमीन का मुआवजा देने की कवायद जोरों पर है, जिसके बाद भवन व अन्य आंकलन होंगे। करीब 100 किमी लंबा निर्माण प्रस्तावित है।
इस निर्माण से जहां चंडीगढ़ से शिमला पहुंचने के लिए दूरी कम होगी, वहीं जाम से भी निजात मिलेगी। मिनिस्टरी ने सोलन तक फोरलेनिंग करने के लिए 2730 करोड़ की डीपीआर तैयार की है।
फोरलेन के तहत 67 किलोमीटर के 65.0 हेक्टेयर भूमि में कटने वाले हजारों पेड़ों की कीमत का आंकलन कर लिया गया है। मंत्रालय ने इन पेड़ों की कीमत 8.75 करोड़ रुपये आंकी है। यह पेड़ परवाणू से शोघी तक परिक्षेत्र में कटेंगे।