52 साल बाद जन्माष्टमी पर अनूठा संयोग, पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं
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इस बार भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पावन त्योहार 52 साल बाद अनूठा संयोग लेकर आ रहा है, जब माह, तिथि वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी बनी हुई है जैसी भगवान कृष्ण के जन्म के समय थी। पहले ऐसा योग वर्ष 1958 में बना था।
मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र्रपद अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस योग को बहुत शुभ माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस योग में भगवान की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल मिलेगा और सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
कृष्ण जन्माष्टमी 24 अगस्त बुधवार को रात 10 बजे से लेकर 17 मिनट पर शुरू होगी जो वीरवार शाम 8 बजकर आठ मिनट तक रहेगी। ऐसे में लोग इस शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना कर सकते हैं।
अति शुभ योग, होगा कष्टों का निवारण
राजधानी शिमला के राम मंदिर व कृष्ण मंदिर के पुजारी जीत राम और सुशील शर्मा ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का अति शुभ योग जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी को शुद्ध मनोभाव के साथ मनाने से मनोकामनाएं पूण होंगी और कष्टों का निवारण होगा।
जन्माष्टमी के लिए सजे राजधानी के बाजार
जन्माष्टमी के लिए राजधानी के बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। रंग- बिरंगी लाइटों से दुकानें जगमगा रही हैं। दुकानों के अलावा शहर के मंदिर भी रंग बिरंगे फूलों से सज रहे हैं।
60 से 500 रुपये में मिल रहे लड्डु गोपाल
लोअर बाजार में 60 से लेकर 500 रुपये में लड्डू गोपाल बिक रहे हैं। वहीं बांसुरी 10 से लेकर 30 रुपये, रंग-बिरंगे भगवान के वस्त्र 10 से 50 रुपये तक बिक रहे हैं।
लेजर लाइट्स से सजेगा राम मंदिर
जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर राजधानी के राम मंदिर में 15 फुट ऊंची लेजर लाइट्स लगेंगी जिसमें शाम के समय राधा-कृष्ण, नंद यशोदा और बाल गोपाल के चित्र प्रदर्शित होंगे। शाम के समय लड्डु गोपाल की विशेष पूजा अर्चना होगी और झूला झूलाया जा जाएगा।