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मंत्रियों और विधायकों ने डुबो दी भोरंज उपचुनाव में कांग्रेस की नैया

Sat, 15 Apr 2017 04:42 PM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 15 Apr 2017 04:42 PM IST
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Bhoranj By Election: Analysis of Congress defeat

भोरंज विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की नैया इसी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों ने डुबो दी। अपनी तमाम मुश्किलों के बावजूद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भोरंज विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन हफ्ते में पांच दौरे किए और दर्जनों जनसभाएं कीं। लेकिन सरकार के कुछ बड़े मंत्री चुनाव प्रचार में शक्ल दिखाने भी भोरंज नहीं पहुंचे।

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जबकि भाजपा नेतृत्व ने अपनी टीम के साथ भोरंज के इस चुनावी रण के बीच तंबू ही गाड़ दिया था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भोरंज उपचुनाव में मंत्रियों, विधायकों और कांग्रेस के तमाम बडे़ नेताओं की अलग-अलग सेक्टर और ग्राम पंचायतों में प्रचार की ड्यूटी
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लगाई पर कांग्रेस के इन दिग्गजों में से कई तो वहां गए ही नहीं। जिन मंत्रियों ने पहले के तय प्रत्याशी रमेश डोगरा का दूसरे ही दिन टिकट कटवाने और जिला परिषद में अच्छी पकड़ रखने वाली प्रोमिला देवी की उम्मीदवारी फाइनल करवाई उनमें से भी कुछ तो वहां नजर तक नहीं आए।

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तो इस वजह से हारी कांग्रेस

Bhoranj By Election: Analysis of Congress defeat

भोरंज में भाजपा के प्रत्याशी डा. अनिल धीमान के जीतने के मार्जन को कांग्रेस नेता प्रचार में गंभीरता दिखाते हुए कम कर सकते थे। वे पूरे जोरों से यहां मेहनत करते, तो नतीजा कुछ और भी हो सकता था। खासकर तब जबकि पूर्व मंत्री स्वर्गीय आईडी धीमान के पुत्र डा. अनिल धीमान को टिकट देने के बाद भाजपा के बागी पवन कुमार ने परिवारवाद का नारा चलाकर उनके खिलाफ अभियान भी छेड़ दिया था।

बागी पवन कुमार ने वोट भी अच्छे लिए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू भोरंज में मंत्रियों और विधायकों के लिए अलग-अलग प्रचार के इलाके तय करते ही रह गए और हमेशा की तरह मंत्री, पूर्व मंत्री और विधायकों सहित कई दिग्गज नेताओं ने उनके फरमान को हल्के में ही लिया।

नहीं काम आई वक्त से पहले बजट सत्र को स्थगित करने की रणनीति

Bhoranj By Election: Analysis of Congress defeat

भोरंज उपचुनाव में वक्त से पहले बजट सत्र को स्थगित करने की कार्रवाई करवाने की रणनीति भी कांग्रेस के काम नहीं आ पाई। बजट सत्र को सात अप्रैल को खत्म होना था। सदन में कांग्रेस ने इसे 31 मार्च को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दिया।

भाजपा इसका विरोध करती रही। सत्ता पक्ष की पार्टी कांग्रेस ने हाउस का एजेंडा खत्म बताकर इसे तय वक्त से एक हफ्ते पहले ही स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया। फिर ये माना जा रहा था कि सभी मंत्री, विधायक और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रचार में जुट जाएंगे।

मगर ठीक ऐसा ही नहीं हुआ। सीबीआई और ईडी की कार्रवाइयों से मुश्किलों में घिरे होने के बावजूद सीएम वीरभद्र सिंह ही भोरंज में ज्यादा सक्रिय दिखे। हालांकि, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू भी संगठन प्रमुख होने के नाते लगातार भोरंज की रैलियों में शामिल होते दिखे।

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