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ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए बुरी खबर, पढ़ें जरूर

Thu, 28 Jan 2016 09:10 AM IST
Updated Thu, 28 Jan 2016 09:10 AM IST
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ban on govt teachers tutions.

सरकारी शिक्षकों को अब कोचिंग सेंटर चलाना या ट्यूशन पढ़ाना महंगा पड़ सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने देश की सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के प्रबंधन और विकास के लिए बनाई जाने वाले स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमेटी (एसएमडीसी) अब शिक्षकों की गतिविधियों पर भी नजर रखेंगी।

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सरकारी स्कूलों के स्तर को सुधारने के लिए बनी ये कमेटियां अब इस बात पर भी नजर रखेंगी कि कोई शिक्षक ट्यूशन तो नहीं पढ़ा रहा। अगर ऐसा है तो कमेटी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा विभाग को शिकायत कर सकेगी। इन शिकायतों के आधार पर सरकार शिक्षक पर कार्रवाई करेगी।
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एसएमसी के माध्यम से कार्रवाई

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सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की शुरुआत की। स्कूलों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू हुई स्कीम तहत एमएचआरडी ने हर स्कूल में मैनेजमेंट कमेटी बनाने का प्रावधान किया।

इन कमेटियों के जिम्मे स्कूल का प्रबंधन तो होता ही है, साथ ही स्कूलों में होने वाले निर्माण और पढ़ाई पर भी नजर रखना इनकी जिम्मेदारी होती है। हाल ही में एमएचआरडी ने इन कमेटियों को और अधिक शक्ति प्रदान की हैं।

इन कमेटियों को स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के कामकाज की रिपोर्ट देने की भी जिम्मेदारी सौंप दी है। अब अगर कोई शिक्षक स्कूल में ढंग से न पढ़ाए या स्कूल के बजाय कोचिंग संचालन करने में लिप्त होता है तो उसकी रिपोर्ट ये कमेटियां राज्य और केंद्र सरकार से कर सकेंगी।

स्थानीय लोग और अभिभावक होते हैं कमेटी के सदस्य

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स्कूल स्तर पर बनने वाली इन कमेटियों में लोकल प्रधान या पार्षद, विषय विशेषज्ञ, महिलाएं व स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक शामिल होते हैं। ये कमेटियां स्कूलों के भवनों के निर्माण व रिपेयरिंग के कामों का निरीक्षण और प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने के लिए अधिकृत की गई हैं। इसके अलावा स्कूलों का स्थानीय स्तर पर प्रबंधन भी इन्हीं कमेटियों के जिम्मे होता है।

हिमाचल में सिर्फ 25 प्रतिशत स्कूलों में हैं एसएमडीसी
प्रदेश के हर स्कूल में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी होना अनिवार्य है, लेकिन निर्देशों के बावजूद हिमाचल में सिर्फ 25 प्रतिशत स्कूलों में ही ये कमेटियां गठित हो सकी हैं। हाल ही में एचएचआरडी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर एसएमडीसी के गठन को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। स्पष्ट किया है कि हर माध्यमिक स्कूल में इन कमेटियों का गठन सुनिश्चित किया जाए।

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