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जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा हिमाचल, लोगों ने मनाया जश्न
Wed, 05 Aug 2020 06:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 05 Aug 2020 06:32 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के उपलक्ष्य में हिमाचल प्रदेश में लोगों ने हलवा और लड्डू बांटकर जश्र मनाया। जय श्री राम के उद्घोष से पूरी देवभूमि गूंज उठी। राजधानी शिमला में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने लोगों को लड्डू बांटे।
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शिमला के लोअर बाजार में दुकानों को फूलों से सजाया जा रहा है। शहर में श्री राम के होर्डिंग्स लगे दिखाई दे रहे हैं। पांवटा साहिब में लोगों ने आतिशबाजी और पटाखे चलाए। मंदिरों व घरों में दीये जलाए गए। राम मंदिर के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाले कारसेवकों को लोगों ने बधाई दी।
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शिमला के राम मंदिर की समन्वयक सुनंदा ने बताया कि मंदिर में दोपहर 12 बजे प्रसाद बनाकर लोगों में बांटा गया। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग के चलते मंदिर बंद है जिस कारण की भव्य कार्यक्रम नहीं किया जा रहा है। राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि मंदिर में सुंदर कांड का पाठ किया गया है।
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अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होने से भक्तों में खुशी का माहौल है। ऐसे में श्रीराम की बड़ी बहन शांता के घर में भी जश्न मनाया गया। कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल के बागा में माता को समर्पित एक अनोखा मंदिर स्थापित है। जहां माता शांता के भक्त विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं। हालांकि, अधिकतर लोग उनके तीन भाइयों के बारे में ही जानते हैं।
बहुत कम लोगों को जानकारी है कि उनकी एक बड़ी बहन भी है। जिनका विवाह देवता शृंगा ऋषि के साथ हुआ है। बंजार की चैहणी कोठी के बागा में स्थित मंदिर में देवी शांता की प्रतिमा उनके पति देवता शृंगा ऋषि के साथ विराजमान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विभंडक ऋषि के पुत्र शृंगा ऋषि थे। ऋषि विभंडक वही थे, जिन्होंने राजा दशरथ की पुत्र कामना के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाया था।
मान्यता है कि जब अंगदेश के राजा रोमपद पत्नी के साथ अयोध्या आए थे तो राजा दशरथ को मालूम पड़ा कि उनकी कोई संतान नहीं हैं। तब राजा ने अपनी पुत्री शांता को उन्हें संतान स्वरूप दिया। देवता शृंगा ऋषि के पुजारी मोहर सिंह ने कहा कि घाटी में देवता शृंगा ऋषि और माता शांता की पूजा की जाती है। वरिष्ठ अधिवक्ता कुंभ दास डोगरा ने कहा कि ऋषि के दर्शनों के लिए कुल्लू, मंडी-सराज, शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली आदि जगहों से श्रद्धालु हर वर्ष बागी चैहणी कोठी पहुंचते हैं।