इन गुरुओं ने किया ऐसा काम, आप भी करेंगे सलाम
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प्रदेश में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं, जो लीक से हटकर कार्य कर शिक्षा की लौ जला रहे हैं। घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गरीब की पढ़ाई पर अपना पैसा खर्च कर रहे हैं। अभिभावकों को भी बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। शनिवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ऐसे ही 20 शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।
इनमें चार शिक्षकों को बीते साल मिले नेशनल अवॉर्ड के लिए नवाजा जाएगा। राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले 16 शिक्षकों में एक प्रिंसिपल, एक हेडमास्टर, दो लेक्चरर, एक डीपीई, एक एलटी, तीन टीजीटी, पांच जेबीटी और दो डीएम शामिल हैं। वहीं, पिछले वर्ष राजेंद्र सिंह प्रधानाचार्य रजवारी मंडी स्कूल, गोपाल चंद मुख्याध्यापक मझारनू मंडी स्कूल, रत्न चंद मझीण कांगड़ा स्कूल और निर्जला कुमारी मुख्य अध्यापिका नगरोटा सूरियां स्कूल को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
देष्टा हर साल देते हैं निशुल्क पुस्तकें
- लालपानी स्कूल के लेक्चरर संजय देष्टा शिक्षक परिवार से हैं। इनके परदादा 1907 में टिक्कर में पढ़ाते थे। देष्टा हर साल दस हजार रुपये से निशुल्क पुस्तकें और किताबें जरूरतमंद बच्चों को देते हैं
- करसोग के काओ स्कूल के प्रिंसिपल नरेश राणा का मॉडर्न, इन्वोटिव टीचिंग को लागू करने में बड़ा योगदान रहा है। इन्होंने स्कूलों में इनरोलमेंट बढ़ाई है। इनके अधिकांश स्टूडेंट 80 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर पास होते हैं।
- मकरीड़ी, मंडी स्कूल के लेक्चरर टेक सिंह परमार ने साइंस टीचर के तौर पर पढ़ाना शुरू किया, अब कॉमर्स के लेक्चरर हैं। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में इनके छात्रों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है। इन्होंने पर्यावरण ऑडिट किया है।
- भकरैरी बणी, हमीरपुर स्कूल के टीजीटी संतोष कुमार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का व्यापक प्रचार करने में अहम योगदान दिया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया है।
लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए किया प्रोत्साहित
- जोबडी, सोलन स्कूल के टीजीटी किशोर कुमार ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल में छात्रों का ड्राप आउट घटाने में सफल रहे हैं। लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया है। स्कूल के खस्ताहाल कमरों का जीर्णोद्धार कर सूरत बदली है।
- दत्तनगर, शिमला स्कूल की जेबीटी सरोजनी मेहता ने क्वालिटी एजूकेशन के लिए विदेश का दौरा किया है। स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने और ड्राप आउट घटाने में अहम भूमिका निभाई है।
- मंडी स्कूल की टीजीटी मीना कुमारी ने साल 2008 में स्कूल के मिड-डे मील के कमरे में लगी आग पर काबू पाकर नुकसान होने से बचाया था। इसके अलावा अन्य गतिविधियों में भी इनका योगदान सराहनीय रहा है।
- बढेड़ा राजपूतां, ऊना स्कूल के जेबीटी कुलदीप सिंह के छात्र-छात्राएं बीते दस साल से बैडमिंटन में राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं। कुलदीप सिंह ने सरकारी स्कूलों में घटती छात्रों की संख्या पर नियंत्रण किया है।
वॉल पेंटिंग करने में माहिर
- सोलन गर्ल्स स्कूल के शास्त्री दुर्गा नंद की कक्षाओं के परिणाम बहुत अच्छे रहे हैं। बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते है। सभी आयोजनों में इनका सक्रिय योगदान रहा है।
- गुग्गाघाट, सोलन स्कूल के डीएम कामेश्वर शर्मा वॉल पेंटिंग करने में माहिर हैं। डाइट में कार्य करते हुए इनकी ओर से किए गए कार्य की वर्ल्ड बैंक की टीम सराहना कर चुकी है। इन्हें अवंतिका राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है।
- मातर सिरमौर स्कूल के हेडमास्टर कमल किशोर शर्मा का एनएसएस में विशेष योगदान रहा है। स्कूल के सर्वांगीण विकास, स्वच्छता और अच्छे परिणाम लाने में इन्होंने योगदान दिया है।
- कयालु, शिमला स्कूल के जेबीटी डा. महेंद्र शर्मा गरीब बच्चों को स्वैच्छिक निधि से पैसा देकर पढ़ाते हैं। 20 साल तक इन्होंने प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में सेवाएं दी हैं। छात्रों के मार्गदर्शन को लेकर किताब भी लिखी है।
छह बार हिमाचल के सर्वश्रेष्ठ बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे
- बगडागलू, मंडी स्कूल के डीपीई राकेश कुमार छह बार हिमाचल के सर्वश्रेष्ठ बास्केटबॉल खिलाड़ी चुने गए हैं। छात्रों के साथ राकेश देश में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- मोहरी शिमला स्कूल के जेबीटी वीरेंद्र कुमार साल 2004 से अभी तक स्टेट रिर्सोस ग्रुप के सदस्य रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान में छपने वाली अधिकांश पुस्तकों में संपादक रहे हैं। दो किताबें स्वयं भी लिख चुके हैं।
- बुंबलू, हमीरपुर स्कूल के जेबीटी कमलेश कुमार ने स्कूल के शौचालय और भवन निर्माण में खासी रुचि दिखाई है। स्कूल का परीक्षा परिणाम बेहतर करने में अहम भूमिका निभाई है।
- मझवाड़, मंडी स्कूल की डीएम निशा राणा छात्रों को योग कराने, आयुर्वेदिक पौधों, औषधियों का ज्ञान देने में सक्रिय रही हैं। छात्रों में अनुशासन और आदर्श विद्यार्थियों के गुणों का विकास करने में अहम योगदान दिया है।
दो शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय अवार्ड
प्रदेश के दो शिक्षकों को शनिवार को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। साल 2014 में प्रदेश में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को पाठशाला में लागू करने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुंडखर जिला हमीरपुर के नवीन गौतम और केवीएस होल्टा कैंप पालमपुर के संजीव शर्मा को विज्ञान भवन नई दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति इन शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित करेंगे।
संदेश को आज मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान: बिलासपुर। शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर बिलासपुर की शिक्षिका संदेश शर्मा शनिवार को दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होंगी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें सम्मानित करेंगे। उन्हें 50 हजार रुपये और सिल्वर मेडल दिया जाएगा। संदेश शर्मा दिल्ली रवाना हो गई है। साहित्य क्षेत्र में भी उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में रहते हुए भी बच्चों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई। उनके कार्यकाल में स्कूलों को जिला स्तरीय स्वच्छता और अन्य कई अवार्डों से नवाजा जा चुका है।
सीएचटी के तौर पर कई ग्रामीण स्कूलों में अपनी सेवाएं देने के बाद संदेश शर्मा 31 मार्च, 2015 को राजकीय केंद्र पाठशाला गालियां से सेवानिवृत्त हो गई हैं। बताया कि उनके सामाजिक कार्य सेवानिवृत्त होने के बाद भी जारी रहेंगे। संदेश शर्मा ने इसका श्रेय पति भारतीय सेना से सेवानिवृत्त रणजीत शर्मा सहित अन्य परिजनों को दिया है।
मनीषा को पीएम से बात न होने का मलाल
मंडी। सीनियर सेकेंडरी स्कूल रंधाड़ा की छात्रा मनीषा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात न होने का मलाल है। शुक्रवार को दस राज्यों के दस बच्चों ने प्रधानमंत्री से सीधी बात कर प्रश्न पूछे। उच्च शिक्षा निदेशालय ने पीएम से सीधी बात के लिए मनीषा का रिकॉर्ड तलब किया था, लेकिन शुक्रवार सुबह डीसी ऑफिस के वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल पहुंचीं मनीषा का फाइनल सूची में नाम नहीं मिला।
वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल में पीएम के साथ सीधी बात को सभी तैयारियां की गई थीं। एनआईसी का एक अधिकारी भी तैनात किया था। जमा दो विज्ञान संकाय की छात्रा मनीषा निराश ने खूब तैयारी की थी, लेकिन सूची में नाम न होने से उनके अरमानों पर पानी फिर गया।
हालांकि, उन्होंने प्रधानाचार्य हेमराज भूपाल के साथ पूरे कार्यक्रम को डीसी कार्यालय में लाइव देखा। वह पीएम से बात होने की उम्मीद से कार्यक्रम समाप्त होने तक बैठी रहीं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में मनीषा ने बताया कि उन्होंने पीएम से देश में बढ़ रहे महिला उत्पीड़न और जंगलों को हो रहे नुकसान पर प्रश्न पूछने थे। इसके लिए कड़ी मेहनत की थी।
वहीं, प्रधानाचार्य हेमराज भूपाल ने बताया कि करीब एक सप्ताह पूर्व उच्च शिक्षा निदेशालय ने मनीषा का डाटा तलब किया था, लेकिन शुक्रवार को फाइनल सूची में मनीषा का नाम नहीं मिला। मनीषा का जंगल सेवर मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान जा चुका है। मॉडल को प्रगति मैदान नई दिल्ली में प्रदर्शित किया जा चुका है। यहां दस हजार रुपये ईनाम भी मिला है।