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फंड का दुरुपयोग: एकीकृत बागवानी विकास परियोजना में गड़बड़झाला, ऑडिट में लगीं आपत्तियां

Wed, 16 Feb 2022 01:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 16 Feb 2022 01:07 PM IST
सार

ऑडिट में साफ शब्दों में लिखा है कि इसमें एमआईडीएच के फंड का दुरुपयोग हुआ है। प्रदेश में हर साल केंद्र सरकार की वित्तीय मदद से एकीकृत बागवानी विकास परियोजना पर 150 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन ऑडिट में बताया गया कि इस राशि का दुरुपयोग किया गया।

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Audit report reveals that misappropriation of funds in Mission for Integrated Development of Horticulture in Himachal Prdaesh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र से मिल रही वित्तीय मदद से हिमाचल प्रदेश में चल रही एकीकृत बागवानी विकास परियोजना (एमआईडीएच) में गड़बड़झाला सामने आया है। ऑडिट में सामने आया है कि खर्च की गई राशि का दुरुपयोग हुआ है और इसकी जांच की जाए। ऑडिट में लगाई आपत्तियों में कहा गया है कि परियोजना के कामकाज से राज्य के भीतर और बाहर अधिकारियों के टूअर के लिए किराये पर वाहन उपलब्ध है तो बागवानी विभाग ने इसके लिए किराये पर दूसरा वाहन क्यों लिया। 

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एमआईडीएच के प्रोजेक्ट निदेशक के दफ्तर ने एक टैक्सी (एचपी01ए- 6589) प्रति माह के हिसाब से किराये पर ले रखी है, ताकि इसमें अधिकारी और कर्मचारी टूअर कर सकें। दस्तावेजों की जांच करने के बाद ऑडिट में पाया गया है कि अधिकारियों ने 1.41 लाख का संदिग्ध भुगतान दूसरी टैक्सी के लिए किया है।
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विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक ने 7 जनवरी 2021 को लॉग बुक में हस्ताक्षर किए, जिसमें टैक्सी (एचपी 01ए- 6835) और टैक्सी (एचपी01ए- 6589) को 25500 रुपये का भुगतान किया गया। ये वाहन लॉग बुक के पेज संख्या 35 में 21 से 27 सितंबर, 2020 की तारीख में नवबहार से सोहेल पालमपुर-नेरी और घुमारवीं के टूअर में दर्शाया गया है। 
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इसी तरह से तत्कालीन एसएमएस के उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जाने और शिमला आने पर 31 दिसंबर 2020 से 8 जनवरी, 2021 के टूअर के लिए टैक्सी पर 44,900 रुपये खर्च किए। इसके बाद इस अधिकारी ने चंडीगढ़-अबोहर, हिसार और वहां से शिमला आने पर 29200 रुपये व्यय किए। अन्य एसएमएस ने परियोजना के 15,500 रुपये शिमला से पंजाब के अबोहर के टूअर के लिए टैक्सी की व्यवस्था करके व्यय किए।

तत्कालीन प्रोजेक्ट निदेशक ने 17 से 19 जनवरी 2021 तक शिमला से चंडीगढ़ के टूअर पर 6000 रुपये व्यय किए। तत्कालीन फोटो अफसर पर शिमला से जम्मू टूअर के लिए 20,018 रुपये व्यय किए। ऑडिट में साफ शब्दों में लिखा है कि इसमें एमआईडीएच के फंड का दुरुपयोग हुआ है। प्रदेश में हर साल केंद्र सरकार की वित्तीय मदद से एकीकृत बागवानी विकास परियोजना पर 150 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन ऑडिट में बताया गया कि इस राशि का दुरुपयोग किया गया।


दूसरी ओर दो बैंकों में बचत खाते में जमा की गई परियोजना राशि को लेकर भी आपत्ति उठाई गई है। इस संबंध में बार-बार रिमांइडर देने पर भी विभाग की ओर से कोई हिसाब नहीं दिया गया। इस परियोजना पर अस्सी फीसदी वित्तीय भागीदारी केंद्र और बीस फीसदी राज्य सरकार की रहती है।

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