प्रदेश में गरमाई सियासत, भाजपा ने मांगा वीरभद्र का इस्तीफा
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर सीबीआई की नई जांच से हिमाचल में सियासत गर्मा गई है। सतारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष में बैठी भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष जहां मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांग रहा है वहीं सतापक्ष का कहना है कि पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के इशारे पर एक षडयंत्र के तहत मुख्यमंत्री को फंसाने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बचाव में उतर आए हैं। सीबीआई की ओर से शुरू की गई प्राथमिक जांच को उन्होंने सीएम को परेशान करने वाली हरकत करार दिया है। मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ दर्ज प्रारंभिक जांच का मामला उनकी छवि को धूमिल करने और प्रदेश में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की चाल है।
भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जान-बूझकर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्य कर रही है। यह सब पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के इशारे पर किया जा रहा है। वह स्वयं कई मामलों में फंसे हैं। भाजपा करोड़ों के घोटाले और मनी लांडरिंग मामलों में फंसे पूर्व आईपीएल आयुक्त ललित मोदी के मामले में वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और राजस्थान की मुख्यमंत्री की संलिप्तता के चलते बुरी तरह घिरी हुई है।
भाजपा के पास अपने नेताओं की कारगुजारियों का कोई जवाब नहीं है। लोगों और मीडिया का ध्यान बांटने के लिए इस तरह का प्रयास कर रही है। कहा कि उनका वीरभद्र के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। वे मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। विद्या स्टोक्स, कौल सिंह, जीएस बाली, सुजान सिंह पठानिया, ठाकुर सिंह भरमौरी, मुकेश अग्निहोत्री, सुधीर शर्मा, प्रकाश चौधरी, धनीराम शांडिल और ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को उत्पीड़ित करने के लिए जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर इनका दुरुपयोग कर रही है।
अपने फैलाए कीचड़ में दूसरों को न लपेटें: भाजपा
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की ओर से प्राथमिक जांच शुरू करने पर पूर्व मंत्रियों ने सीएम से इस्तीफा मांगा है। कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
पूर्व मंत्रियों में गुलाब सिंह ठाकुर, रविंद्र सिंह रवि, राजीव बिंदल, नरेंद्र बरागटा और प्रवीण शर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी है कि वह अपने पद का दुरुपयोग न करें। वीरभद्र के अपने खिलाफ सीबीआई जांच के लिए पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को जिम्मेदार ठहराने का भाजपा नेताओं ने कड़ा संज्ञान लिया है।
कहा कि मुख्यमंत्री अपनी ओर से फैलाए कीचड़ में दूसरों को न लपेटें तो बेहतर होगा। धूमल ने उन्हें नहीं कहा था कि वह अपने काले धन को छुपाने के लिए झूठे हथकंडे अपनाएं। आज मामले का खुलासा होने पर कानून के शिकंजे में जकड़े जा चुके हैं। वह जनता का ध्यान बंटाने को दूसरों पर झूठे आरोप तो लगा लें, पर जनता जानती है कि सीबीआई नेता प्रतिपक्ष के अधीन नहीं है।
स्टेट विजिलेंस जरूर वीरभद्र सिंह के अधीन है, जिसका दुरुपयोग वह पिछले ढाई वर्षों से अपने राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने के लिए कर रहे हैं। कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं। इस स्थिति में उन्हें दोषारोपण की राजनीति के बजाय कानून का सम्मान करते हुए जांच का सामना चाहिए, क्योंकि पूर्व में वह भी अपने राजनीतिक विरोधियों को यही सलाह देते रहे हैं।