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देश में पहली बार खेतों में अंकुरित हुआ औषधीय गुणों से भरपूर हींग का पौधा

Thu, 01 Apr 2021 10:48 AM IST
Krishan Singh अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 01 Apr 2021 10:48 AM IST
सार

  • पांच माह पहले लाहौल में रोपे गए हींग की पनीरी हुई अंकुरित
  • औषधीय गुणों से भरपूर हींग की अब देश में होगी व्यापक खेती
  • हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत रंग लाई

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Asafoetida plant rich in medicinal properties  germinated in the fields for the first time in the country
खेतों में अंकुरित हुआ हींग का पौधा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय इलाके से खेती के क्षेत्र में देश में एक क्रांतिकारी बदलाव आने के संकेत मिले हैं। भारत में पहली बार किसानों के खेत में हींग के पौधे अंकुरित हुए हैं। हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के वैज्ञानिकों की सालों की मेहनत रंग लाई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि भारत में हींग को किसानों ने अपने खेतों में अंकुरित किया है। हालांकि आईएचबीटी पालमपुर के वैज्ञानिक अफगानिस्तान से लाए गए हींग के बीज से लैब में पनीरी तैयार करने में सालों से जुटे थे। अब लैब में तैयार पनीरी को पहली बार खेतों में अंकुरित किया गया है। अब देश में हींग की खेती की संभावना बढ़ गई है।

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घाटी में जमीन से बर्फ पिघलने के बाद इसके नीचे हींग के पौधे अंकुरित होने की खबर से किसानों में बेहद खुशी है। हींग के रोपी गई पनीरी अंकुरित होने से यह दावा और पुख्ता हो गया है कि लाहौल घाटी की आबोहवा हींग की पैदावार के लिए माकूल है। क्वारिंग गांव के किसान रिगजिन हायरपा ने हींग के पौधे अंकुरित होने की सूचना कृषि विभाग को दी है। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों में आईएचबीटी पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार हींग की खेती पर रिपोर्ट लेने टीम के साथ खुद लाहौल का दौरा करेंगे। भारत में दुनिया में तैयार होने वाले हींग की करीब 50 फीसदी खपत होती है।
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समुद्रतल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर लाहौल के गेमूर गांव में 17 अक्तूबर को देश में सबसे पहले हींग की पनीरी बीजी थी। घाटी में फिलहाल सात किसानों को इस मुहिम के लिए चुना है। इन किसानों के पांच बीघा खेतों में हींग रोपा था। देश में सलाना हींग की खपत करीब 1200 टन है। भारत अफगानिस्तान से 90, उज्बेकिस्तान से आठ और ईरान से दो फीसदी हींग हर साल आयात करता है। हींग की खेती के लिए 20 से 30 डिग्री तापमान जरूरी है। लाहौल में ट्रायल के तौर पर क्वारिंग, मडग्रां, बीलिंग और केलांग में हींग रोपा है। 

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पांच साल में तैयार होता है हींग

Asafoetida plant rich in medicinal properties  germinated in the fields for the first time in the country
हींग का पौधा - फोटो : अमर उजाला

आईएचबीटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक अशोक कुमार का कहना है कि हींग की फसल पांच साल में तैयार होती है। इसकी जड़ पूरी तरह तैयार होने पर ही बीज तैयार होते हैं। हींग के पौधे तैयार करने वाले क्वारिंग गांव के किसान रिगजिन हायरपा ने बताया कि खेतों से जब बर्फ की चादर पिघली तो उन्होंने करीब 5 माह पहले रोपी हींग के पनीरी को अंकुरित होते देखा। 

हींग का अंकुरित होना बड़ी कामयाबी : अंजू
कृषि विभाग में तैनात एडीओ अंजू का कहना है कि हींग के डोरमेटी प्लांट का अंकुरित होना साबित करता है कि लाहौल की आबोहवा हींग उत्पादन के लिए उपयुक्त है। 

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