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रिपोर्ट में खुलासा, हिंदी भी नहीं पढ़ पा रहे प्राइमरी के विद्यार्थी

Tue, 28 Mar 2017 09:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 28 Mar 2017 09:22 AM IST
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Around 25% Primary school students can’t read Hindi

प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी मातृ भाषा हिंदी को भी सही तरीके से पढ़ नहीं पा रहे हैं। जिला हमीरपुर के नादौन और जिला कांगड़ा के इंदौरा शिक्षा खंड में 25 फीसदी स्कूली बच्चों को हिंदी विषय में ई ग्रेड मिला है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा संयुक्त तौर पर प्राइमरी स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के बाद तैयारी की गई रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है।

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इंदौरा शिक्षा खंड के तहत तीसरी और पांचवीं के विद्यार्थियों पर किए गए अध्ययन में 25 फीसदी से ज्यादा स्कूली बच्चे हिंदी विषय में ई ग्रेड हैं। नादौन खंड में इन्हीं कक्षाओं में 24 फीसदी से ज्यादा बच्चे ई ग्रेड के तहत आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली बच्चों का हिंदी पढ़ने और लिखने का ज्ञान बहुत कम है।
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चार जिलों चंबा, शिमला, सोलन और सिरमौर के नौ शिक्षा खंडों में एक तिहाई बच्चे से भी कम बच्चे ए और बी ग्रेड प्राप्त कर सके हैं। जिला शिमला के रोहड़ू, सिरमौर के माजरा, बकरास, पांवटा साहिब, सोलन के नालागढ़, धर्मपुर और जिला चंबा के सिहुंता, कलहेल और चुवाड़ी शिक्षा खंड में एक तिहाई से भी कम बच्चे ए और बी ग्रेड प्राप्त कर सके हैं।

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इन जिलों में राहत भरी खबर

Around 25% Primary school students can’t read Hindi

रिपोर्ट के मुताबिक राहत भरी खबर है कि छह जिलों शिमला, सोलन, सिरमौर, चंबा, कांगड़ा और हमीरपुर के सिर्फ 12 शिक्षा खंडों में 60 फीसदी विद्यार्थियों को ए और बी ग्रेड मिला है। इसमें जिला शिमला का ठियोग, कुपवी, सोलन का कुठाड़, अर्की, सिरमौर का सराहन, चंबा का सुंडला, कांगड़ा का पंचरुखी, पालमपुर, लबांगांव, देहरा और हमीरपुर जिला का भोरंज और बिझड़ी शिक्षा खंड शामिल है।

1088 स्कूलों का किया गया निरीक्षण
सरकारी स्कूलों में शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं को जांचने के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय के संयुक्त तत्वाधान में प्रदेश के छह जिलों में 1088 प्राइमरी स्कूलों का बीते तीन महीनों के दौरान औचक निरीक्षण किया गया। स्कूलों के निरीक्षण को गई विभिन्न टीमों ने 62800 विद्यार्थियों और 3270 शिक्षकों से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की है।

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