Sanjauli Masjid case: स्थानीय लोगों को पार्टी बनाने का आवेदन खारिज, इस दिन होगी अगली सुनवाई
संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण गिराने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर जिला अदालत में गुरुवार को सुनवाई हुई।
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संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण गिराने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर जिला अदालत में वीरवार को सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सोमवार को नगर निगम के फैसले के खिलाफ दायर अपील में स्थानीय लोगों को पार्टी बनाने की अर्जी को खारिज किया है। अदालत ने लोकस स्टैंडाई के आधार पर स्थानीय लोगों के आवेदन को खारिज किया है। अदालत ने टिप्पणी की है कि स्थानीय लोगों को इस मामले में पार्टी बनने का कोई अधिकार नहीं है।
अब मुख्य अपील में अंतिम बहस 18 नवंबर को होगी। पांवटा साहिब के रहने वाले अपीलकर्ता नजाकत अली हाशमी ने एमसी आयुक्त के फैसले के खिलाफ 5 अक्तूबर को जिला अदालत में अपील दायर की है। आरोप लगाया है कि मोहम्मद लतीफ की ओर से जो हलफनामा दायर किया है, वह गैर कानूनी है। इस अपील पर 6 नवंबर को अदालत ने मस्जिद के अवैध निर्माण गिराने के आयुक्त के फैसले पर रोक लगाने से इन्कार किया था जबकि एमसी आयुक्त से फैसले का रिकाॅर्ड तलब किया था।
इसी दिन स्थानीय लोगों की ओर से इस मामले में पार्टी बनाने के लिए आवेदन किया जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई तक अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। 11 नवंबर को अपीलकर्ता और वक्फ बोर्ड ने यह दलीलें दीं कि स्थानीय लोगों की कोई सोसायटी या संस्था नहीं है। ऐसे में इस मामले में स्थानीय लोगों के आवेदन को खारिज किया जाए।अदालत ने स्थानीय लोगों को पार्टी बनाने के आवेदन को सुरक्षित रखा था। नगर निगम आयुक्त ने हलफनामों के आधार पर मस्जिद की अवैध तीन मंजिलों को गिराने के आदेश दिए हैं। यह मामला पूरे देश में काफी चर्चा में रहा है।
यह है पूरा मामला
संजौली मस्जिद में कथित अवैध निर्माण को लेकर 11 सितंबर को संजौली बाजार में उग्र प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की हजारों की भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा। दोनों तरफ से हुई झड़प में 10 लोग घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों के पथराव करने से कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए थे। इसके बाद मंडी समेत प्रदेशभर में मस्जिदों में हुए अवैध निर्माण और प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर उग्र प्रदर्शन हुए। 12 सितंबर को खुद मस्जिद के अध्यक्ष लतीफ मोहम्मद ने मस्जिद की तीन अनधिकृत मंजिलों को गिराने की पेशकश की थी। इसके बाद 5 अक्तूबर को आयुक्त ने मस्जिद कमेटी को यह अनुमति दे दी थी और दो माह में अपने खर्च पर अवैध निर्माण हटाने को कहा था।