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सेब पेड़ कटान मामले में हाईकोर्ट पहुंची सरकार

Sat, 25 Jul 2015 12:02 PM IST
Updated Sat, 25 Jul 2015 12:02 PM IST
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apple tree cutting case, hp govt filled petition in highcourt.

सेब के पेड़ कटने पर मचे हो हल्ले के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार प्रदेश हाईकोर्ट से पुराने फैसले में संशोधन की गुहार लगा दी है। सरकारी भूमि पर किए कब्जों से हरे पेड़ काटने के मामले में हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेशों में आंशिक संशोधन करने के आग्रह को लेकर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को आवेदन दायर किया है। इस आवेदन पर सुनवाई सोमवार को होगी।

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शुक्रवार को सरकार ने एक आवेदन दायर कर प्रदेश भर में हरे पेड़ों को काटे जाने के विरोध को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेशों में आंशिक संशोधन की गुहार लगाई है। सरकार ने इस आवेदन में हाईकोर्ट के आदेशों को पर्यावरण की दृष्टि से सराहनीय कदम बताया है। लेकिन कहा कि वे सिर्फ खड़ी फसलों और सेब पौधों को काटे जाने के आदेशों में संशोधन चाहती है।
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ये है सरकार की मांग

apple tree cutting case, hp govt filled petition in highcourt.

सरकार ने मांग की है कि इस तरह के बगीचों को फसल सहित वन विभाग को सौंपा जाए ताकि पर्यावरण के साथ-साथ जंगली जानवरों व पक्षियों के भोजन के लिए फलों का सही ढंग से इस्तेमाल हो सके। सरकार चाहती है कि इन बगीचों से होने वाली आय को पुन: वनीकरण के लिए खर्च किया जाए। सरकार ने आवेदन में कहा है कि इन बगीचों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने का खर्चा कब्जाधारियों से ही वसूला जाएगा।

राज्य सरकार ने कहा है कि पेड़ों को काटने से वातावरण पर विपरित असर पड़ सकता है। सरकार ने बंदरों के उत्पात से कृषकों को बचाने के लिए समय-समय पर हाईकोर्ट पर जारी आदेशों की अनुपालना को सुनिश्चित करने के लिए इन पेड़ों को कटने से बचने के लिए जरूरी बताया है।

सरकार ने कहा है कि बंदरों को इन बगीचों से भोजन मुहैया करवाया जा सकता है। बंदरों को शहरों, गांवों और सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश से भी रोका जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से आवेदन दायर करने की पुष्टि महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने की है।

क्या कहा सरकार ने?

apple tree cutting case, hp govt filled petition in highcourt.

--बगीचों को फसल समेत हमें सौंपा जाए ताकि पर्यावरण के साथ-साथ जंगली जानवरों व पक्षियों के भोजन के लिए फलों का सही इस्तेमाल हो
--इन बगीचों से होने वाली आय को फिर से वनीकरण के लिए खर्च किया जाए
--बंदरों को इन बगीचों से भोजन मुहैया करवाया जा सकता है
--इन बगीचों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने का खर्चा कब्जाधारियों से ही वसूला जाएगा

यह है मामला
न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने देवदार के पेड़ों को काटने के पश्चात वन भूमि पर अवैध ढंग से विकसित किए गए बगीचों को काटने के आदेश दिए। खंडपीठ ने अवैध कब्जाधारियों से पेड़ों को काटने पर आए खर्च को वसूलने के आदेश भी दिए थे।

इसी खंडपीठ ने अवैध कब्जों के तहत बनाए गए स्थायी और अस्थाई ढांचों की बिजली व पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने अपने आदेशों की अक्षरश अनुपालना छह महीने के भीतर सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए थे।

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