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बडे़ नोट बंद होने से हिमाचल में सामने आएगा इनका पैसा

Thu, 10 Nov 2016 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 10 Nov 2016 12:46 PM IST
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Apple growing farmers in himachal in big trouble after currency ban

बडे़ नोट बंद होने से बागवानों का पैसा सामने आएगा। बागवानों को ये धन बैंकों में जमा करना होगा। अपने बगीचों से सेब के फलों को बेचने के बाद बागवान अपने घरों में ही पैसा जमा करके रखते हैं। चूंकि सेब सीजन अभी खत्म ही हुआ है, इसलिए बागवानों के पास आजकल भी घरों में खूब नकदी है। बेशक सेब से हासिल आमदनी आय कर से मुक्त हो, मगर बागवान इसके बावजूद कई तरह की आशंका पर इसे घरों में ही जमा करके रखते आए हैं।

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सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण वाले बगीचों से कमाए गए धन को बागवान जमा करने से कतराते रहे हैं। पर अब उन्हें 500 और 1000 रुपये के तमाम जमा नोटों को जमा करना होगा। इससे प्रदेश की आय का एक बड़ा हिस्सा बैंकों में जमा होगा तो ये राज्य के लिए अच्छा ही होगा। हिमाचल में सेब का सालाना कारोबार 2500 से 3500 करोड़ के बीच होता है। ये हर साल घटता-बढ़ता है। हालांकि इतने बड़े कारोबार से बागवान, श्रमिक, आढ़ती, व्यापारी, कार्टन विक्रेता, दवा विक्रेता, परिवहन कर्मी आदि तमाम तरह के लोग जुडे़ हुए हैं। प्रदेश में सेब बागवानी से जुडे़ परिवारों की संख्या करीब छह लाख है।
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राज्य के कृषि-बागवानी क्षेत्र की बात करें तो यहां पर 96 फीसदी किसान-बागवान लघु एवं सीमांत और चार फीसदी ही बडे़ बागवान हैं। माना जा सकता है कि सेब के 25 लाख से लेकर तीन करोड़ रुपये की सालाना आमदनी वाले बागवानों की संख्या करीब चार फीसदी ही है। इसी श्रेणी के अनेक बागवानों के सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण से बगीचे भी हैं।
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ऐसे बागवान बैंकों में सारा पैसा जमा करवाने से हिचकते हैं। सूत्रों की मानें तो कई बागवानों के पास तो घरों में ही लाखों-करोड़ों रुपये रहते हैं। प्रदेश के सेब उत्पादक क्षेत्रों में शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिले प्रमुख हैं। शिमला सबसे बड़ा सेब उत्पादक जिला है, जबकि कुल्लू का स्थान दूसरे नंबर पर है। 

वन विभाग और पुलिस के लिए आसान हो जाएगी कार्रवाई

Apple growing farmers in himachal in big trouble after currency ban

कई बागवानों ने बड़े स्तर पर अतिक्रमण किए हैं। हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के बाद अतिक्रमणकारी बागवानों पर वन विभाग कार्रवाई कर रहा है और पेड़ कटवाकर कब्जे हटा रहा है। इस कार्रवाई के बीच एक चर्चा भी उठने लगी है कि बडे़ बागवानों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

ऐसे में मोदी सरकार के इस फैसले के बाद वन भूमि पर बड़े अतिक्रमण करने वालों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। हालांकि, आयकर विभाग केवल गैर कृषि कार्यों से अर्जित आय पर टैक्स नहीं देने पर ही कार्रवाई कर सकता है। ये कृषि कार्यों से प्राप्त आय पर कुछ नहीं कर सकता है। बेशक ये किसी भी तरह की भूमि से कमाई गई हो। ऐसे में राज्य सरकार के वन और पुलिस महकमों को ऐसे बागवानों को ट्रेस करने में आसानी हो सकती है। 

सेब बागवानों से नहीं लिया जाता कृषि उपज पर टैक्स : प्रीतम सिंह
हालांकि, हिमाचल के आयकर आयुक्त प्रीतम सिंह का कहना है कि प्रदेश के किसी भी बागवान से टैक्स नहीं लिया जाता है। इसकी वजह यह है कि कृषि से बेशक किसी बागवान की करोड़ों रुपये की आय हो जाए, उस पर टैक्स नहीं लग सकता है। कानून में ऐसा प्रावधान ही नहीं है। न ही आयकर विभाग ये अंतर करता है कि सेब बागवानी से आय वन भूमि से है या कृषि भूमि से है। 

बागवान पैसे घर में रखे या बैंक में जमा करे, ऐसे में आयकर विभाग कुछ नहीं कर सकता है। वन भूमि से आय की स्थिति में ये मसला राज्य सरकार की वन विभाग एवं पुलिस जैसी एजेंसियों का हो जाता है। वही एजेंसियां ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर सकती हैं। आयकर विभाग के पास कोई टैक्स चोरी की शिकायत करे तो ही ये महकमा कार्रवाई करता है, मगर बागवान सारे कृषि आय के सबूत पेश करे तो आयकर विभाग का ये मामला नहीं बनता। 

गैर सरकारी मंदिरों के कारिंदों में हड़कंप

Apple growing farmers in himachal in big trouble after currency ban

500-1000 के बड़े नोट बंद होने से अब गैर सरकारी मंदिरों में जमा करोड़ों रुपये सामने आएंगे। कई देवताओं की कमेटियों ने बैंक खाते नहीं खोले हैं, जिससे उनमें हड़कंप है। मंडी जिले में करीब 30 बड़े ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनमें से महज तीन मंदिर सरकार के अधीन हैं। सभी मंदिरों में लाखों के हिसाब से चढ़ावा चढ़ता है।

जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी राजकुमार सकलानी कहते हैं कि सभी देवताओं के कारिंदों को मंदिरों की कमेटी बनाकर पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके अगर मंदिरों ने कमेटियां नहीं बनाई हैं तो उन्हें अब दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उधर, सर्व देवता कारदार समिति के अध्यक्ष पंडित शिव पाल ने बताया कि कई देवताओं के बैंकों में खाते नहीं हैं।

उन्हें समय रहते मंदिर कमेटियों के खाते खोलकर पैसा बैंकों में जमा करना चाहिए। बता दें कि जो मंदिर सरकार के अधीन हैं, उनका पूरा हिसाब सरकार के माध्यम से बैंकों में रहता है। जो मंदिर सरकार के अधीन नहीं हैं, उन देवताओं की कमेटियां पैसे का हिसाब-किताब रखती हैं। लेकिन कई मंदिर ऐसे हैं, जिनकी न तो कमेटियां हैं और न ही पंजीकरण। ऐसे मंदिरों के कारिंदों में हड़कंप है।

बिल्डर, प्रापर्टी डीलरों के उड़े होश, कैसे दिखाएंगे करोड़ों की आय का स्रोत

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500 और 1000 के नोट बंद होने से हिमाचल में बिल्डरों और प्रापर्टी डीलरों के होश उड़ गए हैं। टैक्स बचाने के चक्कर में जमीन की रजिस्ट्री भले ही मौजूदा वैल्यू के हिसाब से की जाती है, लेकिन खरीदार से दस गुना अधिक कीमत वसूली जाती है। इसमें बिल्डरों और खरीदार दोनों को ही फायदा होता है। अब बिल्डरों के गले की यह फांस बन गई है कि टैक्स बचाने के चक्कर कमाई ब्लैक मनी को बैंकों से कैसे व्हाइट करवाएंगे। करोड़ों की आय का स्रोत कैसे दिखाएंगे। खरीदारों को भी ऐसे सौदे महंगे पड़ेंगे।

नियमों के तहत जमीन की रजिस्ट्रियां राजस्व विभाग की ओर से तैयार की गई सालाना औसत के हिसाब से की जाती है। लेकिन प्लॉट और फ्लैट खरीद फरोख्त का लेन देने पहले ही हो जाता है। अगर किसी क्षेत्र में 4 विस्वा जमीन की वैल्यू तीन लाख है तो रजिस्ट्री तीन लाख की करवाई जाती है लेकिन जमीन का सौदा पहले ही 10 से 15 लाख रुपये में हो जाता है।

यही नहीं जब दोनों पार्टियां तहसीलदार के पास खड़ी होती हैं तो तहसीलदार के दोनों पार्टियों से पूछने पर जमीन की वैल्यू वहीं बताई जाती है तो रजिस्ट्री में दर्ज की होती है। दोनों के राजी होने के बाद ही तहसीलदार रजिस्ट्री के दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर करता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। राजस्व विभाग की ओर से जिस क्षेत्र में जमीन की जो वैल्यू होगी उसी हिसाब से रजिस्ट्री होगी। अगर रजिस्ट्री के पहले या फिर बाद में पैसे का लेन देने होता है तो उसमें खरीदने और बेचने वाले दोनों फंसेंगे।

शादी वाले घरों में रखा लाखों का कैश, अब बदलवाने की टेंशन

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देश में 500, 1000 के नोट बंद होने से शादियों की तैयारियों में जुटे घरों के लोगों की परेशानियां बढ़ र्गई हैं। प्रदेश में आज और कल 1500 से अधिक शादी समारोह प्रस्तावित हैं। शादियों के लिए लोगों ने घरों में लाखों रुपये का कैश रखा हुआ है। ऐसे में अब शादी की तैयारियों में जुटे परिवारों ने 500 और 1000 के पुराने नोटों को बदलवाने की रिश्तेदारों को जिम्मेवारियां सौंप दी है।

बैंक खुलने के बाद कई रिश्तेदारों के माध्यम से चार-चार हजार रुपये के पुराने नोट बदलवाने की रणनीति बनाई गई है। कई ऐसे घर भी हैं, जहां वीरवार को शादी है। ऐसे में यह लोग अभी परेशानी के दौर से ही गुजर रहे हैं। एक दिन के भीतर पुराने नोटों को बदलवाना, इनके लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है। 

बारात के लिए टैक्सियों का इंतजाम करना हुआ मुश्किल
राजधानी शिमला के उपनगर संजौली में रहने वाले एक सेवानिवृत्त अफसर ने बताया कि उनके बेटे की शुक्रवार को शादी है। गहनों और कपड़ों की खरीदारी तो उन्होंने पहले ही कर ली है। लेकिन कैटरिंग और टैक्सी वालों को अभी पैसा देना है। कैटरिंग वाला तो चेक से पेमेंट लेने को तैयार है लेकिन टैक्सी वाले नकद मांग रहे हैं। बारात शिमला से सोलन जानी है। गाड़ियों की भी बहुत जरूरत है। ऐसे में उनकी परेशानी बढ़ गई है। 

शगुन में मिली पुरानी नकदी ने खड़ी की परेशानी
शिमला शहर में बुधवार को कई शादियां हुई हैं। शगुन के तौर पर शादी में आए लोगों ने दूल्हा-दुल्हन को 500 और 1000 रुपये के नोट दिए हैं। बुधवार रात को प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद से शादी को खुशी-खुशी निपटाकर घर पहुंचे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। शगुन के तौर पर मिले हजारों-लाखों रुपये बदलवाने के लिए अब इन लोगों को बैंकों और डाकघरों में जाना पड़ेगा। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था ने इन परिवारों का काम बढ़ा दिया है।

बीबियों ने भी निकाली 'ब्लैक मनी', शौहरों के उड़े होश

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मोदी की ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक ने कई गृहणियों के होश उड़ा दिए हैं। इस फैसले के चक्रव्यूह में ऐसी गृहिणियां फंस कर रह गई हैं जो हर महीने घर के खर्च में से कुछ पैसे बचा लेती थीं। अब गृहणियों को बताना पड़ा रहा है कि उनके पास भी 500 और 1000 रुपये के नोट पड़े हैं। कई गृहिणियों के पास दो लाख और इससे ज्यादा की रकम भी है। 

इनमें एक हजार और पांच सौ के नोटों की संख्या ज्यादा है। इनमें से किसी गृहिणी का सपना इन पैसों से प्लॉट खरीदना तो किसी का कार खरीदना तो किसी को अपने लिए ज्वैलरी बनाना था लेकिन एक ही झटके में उनके सपनों पर पानी फिर गया है। कई गृहिणियों ने जब खुलासा किया तो सुनकर पतियों के भी होश उड़ गए। बेशक यह खून पसीने की कमाई है लेकिन अब अगर इन्हें बैंक में भी जमा करवाते हैं तो इनकम टैक्स वालों को क्या जवाब देंगे? 

एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से गृहिणियां भी इन्हें अपने हिसाब से ठिकाने भी नहीं लगा पा रही हैं। ऐसी ही कुछ गृहणियां शहर के कई ज्वैलरी शॉप में पांच सौ और हजार के नोट लेकर गहने खरीदने पहुंची लेकिन ज्वैलरों ने इन पैसों से लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही कई पति अपनी पत्नियों से यह कहते हुए भी सुने गए कि अगर छिपा एक हजार और पांच सौ के नोट रखे हैं तो टाइम से बता दो ऐसा न हो कि यह रद्दी हो जाए। 

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