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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Anupam Kher break down during programme in HPU Shimla

HPU Shimla: विश्वविद्यालय में मिला सम्मान, भावुक हुए अनुपम खेर, छलके आंसू

Sun, 21 Aug 2022 09:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 21 Aug 2022 09:14 PM IST
सार

अनुपम खेर ने कहा कि 38 प्रतिशत अंक लेने वाले को विश्वविद्यालय के इस मंच से सम्मानित किया जा रहा है। उनके इससे ज्यादा कभी नंबर ही नहीं आए हैं।

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Anupam Kher break down during programme in HPU Shimla
भावुक हुए अनुपम खेर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के मंच से सम्मानित होते हुए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर भावुक हो गए और उनके आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि 38 प्रतिशत अंक लेने वाले को विश्वविद्यालय के इस मंच से सम्मानित किया जा रहा है। उनके इससे ज्यादा कभी नंबर ही नहीं आए हैं। दुनिया में सम्मान बहुत मिले, यह सबसे बड़ा सम्मान है।

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अनुपम खेर ने सभागार में घड़ी की सुइयों के 11:30 बजे पर अटकने पर मजाक में कहा कि इससे यह लग रहा है कि वक्त थम गया है। वह सकारात्मक सोच के आदमी हैं। बेशक ये सुइयां अटकी हैं, मगर 24 घंटों में दो बार सही समय देंगी। दर्शक दीर्घा में बैठी अनुपम खेर की मां दुलारी खेर के भी बेटे के भाषण के दौरान आंसू छलक आए। एबीवीपी के छात्रों ने उनके भाषण देने के दौरान कश्मीर को लेकर नारे भी लगाए।
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इस छोटे से शहर शिमला ने मुझे सपने देखना सिखाया : खेर 
बालीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने कहा है कि इस छोटे से शहर शिमला ने उन्हें सपने देखना सिखाया। आज वह जो भी हैं, इन सपनों की वजह से हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर मेहनत करेंगे तो कोई भी ताकत सपने पूरा करने से नहीं रोक सकती है। हर इंसान में बहुत कुछ बनने की उम्मीद होती है। उन्होंने कहा कि वे एक बात का ध्यान रखें कि जो देश और माता-पिता के प्रति प्यार रखते हैं, वही हमेशा सुखी रहते हैं।
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उन्होंने अब तक 530 फिल्में कर ली हैं। दुनिया भर में सम्मानित हुए हैं, मगर यह सम्मान उनके लिए बहुत बड़ा है। शिमला में जन्में अनुपम खेर ने रविवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के मंच से अपनी यादें साझा करते हुए कहा कि जब वह छोटे थे, तब शिमला बहुत अलग तरह का शहर था। इस शहर में वक्त बहुत होता है। उन्होंने अपने शिक्षकों के किस्से सुनाते हुए यहां दर्शकों को खूब हंसाया। अनुपम खेर ने कहा कि उनके एक शिक्षक मुन्नी लाल थे।

उनकी छह बेटियां थीं। वह कहते थे - तू पढ़ बाकी तेरे बारे में मैं सोचता हूं। एक अन्य शिक्षक जयराम थे। उनके पास अलजबरा, गणित आदि सबका डंडा होता था। एक शिक्षक हरदर्शन बहुत भारी-भरकम कद-काठी के थे। वह कहते थे - जिनको याद है, वे खडे़ रहें और जिनको नहीं है, वे बैठ जाएं। जो खड़े होते थे, उन्हें चार डंडे खाने होते थे और जो बैठ जाए और जिनको याद न रहे, उन्हें आठ डंडे खाने होते थे। उनकी भाव-भंगिमाओं ने उन्हें अभिनय के लिए भी बहुत सी चीजें सिखाईं। बाद में वह अभिनय जगत में चले गए।   

सम्मानित होते हुए गर्व महसूस कर रहा हूं : डॉ. गुलेरिया 
एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि उनका छात्र जीवन इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में गुजरा। उन्हें हिमाचली होने पर गर्व है। यहां के लोग सरलता से जीवन जीते हैं। हिमाचल की मिट्टी में ही वह सादगी है, जो जमीन से जोड़े रखती है।  उन्हें हिमाचली होने और इस विश्वविद्यालय का छात्र होने पर गर्व है।


यहां के लोगों की इच्छाएं सीमित होती हैं। वह हमेशा संतुष्ट रहते हैं। उनकी अर्द्धांगिनी डॉ. किरण उन्हें आईजीएमसी शिमला में मिलीं। वह खुद यहीं से पढ़े। आज इस मंच पर सम्मानित होते हुए गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो लगन हिमाचल प्रदेश के मेडिकल छात्रों में है, वह देश के किसी और संस्थान में आज तक देखने को नहीं मिली है। 

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