सीएम के स्कूल के आठ रत्नों से जगेगी अखंड शिक्षा ज्योति की लौ
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प्रदेश में शिक्षा विभाग की अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती योजना की शुरुआत सीएम के स्कूल के आठ रत्नों से होगी। सीएम के बगस्याड़ स्कूल में डिस्प्ले बोर्ड तैयार हो चुका है। इसे सबसे ऊपर सीएम की फोटो से सुशोभित किया गया है। 1968 से 2001 तक के नौ होनहारों को स्कूल के सूचना पट्ट में जगह मिली है।
सोमवार को सीएम योजना की शुरुआत बगस्याड़ स्कूल से कर रहे हैं। इसके बाद योजना पूरे हिमाचल में शुरू होगी। शिक्षा विभाग में अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती योजना शुरू हुई है। सरकारी स्कूलों में पूर्व के मेधावी विद्यार्थियों के नाम स्कूल के सूचना पट्ट पर दर्ज होगे। स्कूलों के बाहर सूचना पट्ट पर नाम लिखने से बच्चे प्रोत्साहित होंगे और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
सीएम के साथ सूचना पट्ट पर इन्हें मिली जगह
बगस्याड़ स्कूल में 1968 बैच के लाल सिंह ठाकुर सेवानिवृत्त कमांडेंट, 1984 बैच से निकले कपूर सिंह रिटायर्ड कैप्टन, 2001 बैच के कैप्टन गुलाब सिंह, 2000 बैच के वैज्ञानिक हंसराज, 1983 के चमन सिंह एसएमओ, 1974 बैच के सेवानिवृत्त एक्सईएन एचपएसईबी बक्शीराम ठाकुर और ललित ठाकुर एक्सईएन हिमुड्डा को सूचना पट्ट में सीएम के साथ जगह मिली है।
मुख्यमंत्री के शिक्षक ने यह कहा- मुख्यमंत्री के पहली से पांचवीं कक्षा के शिक्षक लालूराम का कहना है कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि उनके हाथों से निकला मोती आज प्रदेश की कमान संभाले हुए है। बचपन से जयराम ठाकुर मिलनसार थे और पढ़ने में दिलचस्पी रखते थे। जिज्ञासु और कठिन परिश्रमी थे। इस कारण उन्हें यह मुकाम मिला है।
विषम परिस्थितियों में पढ़े हैं सीएम- सीएम के पिता मिस्त्री का काम करते थे। आर्थिक परिस्थितियां काफी विषम थीं। पहली से पांचवीं तक सीएम बेहद गरीबी में प्राथमिक पाठशाला कुरानी में पढ़े। इसके बाद उन्हें बगस्याड़ में दसवीं तक शिक्षा ग्रहण की। मंडी कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। यहां से राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत हुई।