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Horse Glanders Disease: लंपी के बाद अब घोड़े में ग्लैंडर्स बीमारी, कुल्लू में सामने आया मामला
Wed, 31 Aug 2022 12:14 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 31 Aug 2022 12:14 PM IST
सार
राज्य सरकार ने मंगलवार को घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी के खतरे को देखते हुए इसे अनुसूचित रोग के रूप में अधिसूचित किया है। कुल्लू में एक घोड़े के खून के नमूने की जांच के बाद रोग के लक्षण पाए गए हैं। यह नमूने हिसार की लैब में भेजे गए थे और वहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
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घोड़े(फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पशुओं में लंपी त्वचा रोग के बाद हिमाचल में अब घोड़े को होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी का मामला सामने आया है। इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है और लक्षण बढ़ जाने पर घोड़े की बीमारी से मौत हो जाती है।राज्य सरकार ने मंगलवार को घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी के खतरे को देखते हुए इसे अनुसूचित रोग के रूप में अधिसूचित किया है। कुल्लू में एक घोड़े के खून के नमूने की जांच के बाद रोग के लक्षण पाए गए हैं। यह नमूने हिसार की लैब में भेजे गए थे और वहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
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सरकार ने पशुओं में संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम 2009 की विभिन्न धाराओं में पशु पालन विभाग ने प्रदेश में ग्लैंडर्स बीमारी को अनुसूचित रोग घोषित किया है। कुल्लू को नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया गया है। सामान ढोने वाले घोड़ों में यह रोग साल या दो साल में सामने आता है। राज्य के पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि ग्लैंडर्स रोग से घोड़े के शरीर पर गांठें बनती हैं। इसके बाद घोड़े की मौत हो जाती है। इस रोग का फिलहाल कोई उपचार नहीं है। इस बीमारी से ग्रसित घोड़े को एक्ट में मारने की अनुमति होती है। घोड़े के मालिक को 25 हजार तक का मुआवजा देने का प्रावधान रहता है।
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