बच्चों के साथ तीन महीने से तंबू में रह रही महिला, पढ़ें पूरा मामला
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हिमाचल के सोलन जिले के पंचायत दाड़लाघाट के छामला गांव की एक महिला अपने बच्चों के साथ करीब तीन महीने से घर के बाहर तंबू में रह रही है। लोन की किस्त नहीं चुकाने पर बैंक ने महिला के घर में ताला जड़ दिया है। दुकान की चाबियां भी घर के अंदर ही हैं। अब बिमला के सामने बैंक का कर्ज चुकाने और परिवार का पेट भरने की चुनौती खड़ी हो गई है।
महिला पड़ोसियों से राशन और जरूरत की वस्तुएं मांग कर परिवार का पेट पाल रही है। बीते दिनों तेज आंधी से टेंट भी उड़ गया। ऐसे में परिवार को घर की सीढ़ियों के नीचे शरण लेनी पड़ी है। विमला देवी का कहना है कि वह बैंक का पूरा कर्ज चुकाने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए बैंक से समय मांग रही हैं। बैंक प्रबंधन पर महिला और उसके बच्चों की गुहार का असर नहीं पड़ रहा है।
बैंक शाखा प्रबंधक विकास ने बताया कि विमला देवी के सभी खाते एनपीए है। लोन चुकाने को समय दिया था। नियमानुसार तालाबंदी की कार्रवाई की गई है। बकाया राशि का भुगतान करने पर ही घर और प्रॉपर्टी को रिलीज किया जा सकता है। महिला का कहना है कि बैंक धन्ना सेठों का करोड़ों का कर्ज माफ कर देते हैं, लेकिन उन जैसे छोटे कारोबारियों और गरीबों को लोन चुकाने के लिए थोड़ी सी मोहलत भी देने को तैयार नहीं।
महिला ने 2007 में लिया था हाउस लोन
विमला देवी ने बताया कि दिसंबर 2007 में उन्होंने एसबीआई की शाखा नवगांव से पांच लाख रुपये होम लोन लिया था। समय पर किस्त भरती थीं। इस पर बैंक ने 2010 में ऋण में पांच लाख की बढ़ोतरी कर दी। लेन-देन ठीक था, जिसके चलते 2015 में कपड़ों की दुकान शुरू करने को बैंक ने 10 लाख का मुद्रा लोन भी पास कर दिया। तीन साल तक मुद्रा लोन की किस्त नियमित भरी। इसके बाद धोखाधड़ी का शिकार होने पर मार्च 2019 से फरवरी 2020 तक किस्त नियमित नहीं रख पाईं।
20 फरवरी, 2020 को उन्होंने खाते में 50 हजार रुपये जमा करवाए। हाउस लोन की किस्त रेगुलर भर रही थीं। मूलधन में से 6 लाख से अधिक की राशि बैंक को वापस कर दी। बैंक ने ब्याज, पेनल्टी और अन्य चार्ज जोड़कर बकाया राशि पांच लाख 66 हजार बना दी। इसमें एक लाख से अधिक सिर्फ ब्याज ही है। बैंक के पास घर और प्रॉपर्टी के कागज गिरवी हैं। उन्होंने सरकार और बैंक प्रबंधक से लोन चुकाने को मोहलत देने की मांग उठाई है।