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ग्रीन सैस पर माथापच्ची, नियम तय नहीं कर पा रहा निगम
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:37 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में हजारों अवैध भवनों को नियमित करने को लेकर वसूले जाने ग्रीन सैस को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के तहत नगर निगम अभी यह तय नहीं कर पा रहा है कि किन भवनों से यह शुल्क वसूला जाना है।
क्या वे भवन मालिक इसके दायरे में आएंगे, जिन्होंने अवैध भवनों के नियमितीकरण को लेकर आवेदन कर रखा है या फिर वे जिन्होंने पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण कर दिया है। एनजीटी के फैसले से पहले पास हुए नक्शे में अवैध निर्माण होने की जो शिकायतें आई हैं, उनसे क्या ग्रीन सैस वसूलना है या फिर रूटीन शुल्क वसूला जाना है। साथ ही यह सैस कब से वसूलना शुरू करना है, इस पर भी असमंजस है। अवैध भवनों के नियमितीकरण का मामला अभी प्रदेश हाईकोर्ट के विचाराधीन भी है। ऐसे में फैसला आने तक नगर निगम कोई कदम नहीं उठा सकता। वहीं, पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण के मामले हैं तो नगर निगम पहले भी इनसे कंपाउंडिंग फीस वसूलता रहा है। ऐसे में यह सैस किन से और कब से वसूलना है, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
चार हजार ने कर रखा है नियमितीकरण को आवेदन
शहर में करीब चार हजार ऐसे भवन हैं, जिन्होंने नियमितीकरण को लेकर आवेदन कर रखा है। इनमें ज्यादातर मर्ज एरिया के मकान हैं, जो हाल ही में निगम में शामिल किए गए हैं। अवैध भवनों का आंकड़ा और बढ़ने के भी आसार हैं। क्योंकि नए वार्डों में दर्जनों मकान ऐसे हैं जिन्हें नियमित करने को लेकर भवन मालिकों ने अभी तक आवेदन नहीं कर रखा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि डेवलपमेंट प्लान बनने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि किन भवन मालिकों से कितना सैस लेना है।
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भवन नियमित करवाने को भरना होगा इतना सैस
एनजीटी के फैसले के मुताबिक अवैध भवन को नियमित करवाने के लिए भवन मालिक को 5 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के अनुसार सैस चुकाना होगा। यह शुल्क उन भवनों पर लागू होगा, जिनका उपयोग भवन मालिक निजी तौर पर कर रहे हैं। कामर्शियल भवनों के लिए यह शुल्क 10 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट रखा गया है। इसके अलावा जिन भवन मालिकों ने पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण किया है, उसका शुल्क भी वसूला जाएगा। निगम चेक करेगा कि पास हुए नक्शे से बाहर कुल कितना निर्माण हुआ है। भवन मालिकों से यह शुल्क अवैध निर्माण कर पर्यावरण को हुए नुकसान के एवज में वसूला जाएगा।
शहर के विकास पर ही खर्च होगा पैसा
ग्रीन सैस के तौर पर भवन मालिकों से वसूला जाने वाला लाखों रुपया शहर के विकास पर ही खर्च किया जाएगा। एनजीटी के आदेशों के तहत यह साफ किया गया है कि ग्रीन सैस से जो भी वसूली होगी, उसे शहर की मूलभूत समस्याएं दूर करने और विकास संबंधी कार्यों पर खर्चा जाएगा।
क्या कहते हैं आयुक्त
ग्रीन सैस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए विधि अधिकारियों को इसका गहनता से अध्ययन करने को कहा है। डेवलपमेंट प्लान बनने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि किन भवन मालिकों से यह सैस वसूला जाना है।
जीसी नेगी, नगर निगम आयुक्त
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शिमला। शहर में हजारों अवैध भवनों को नियमित करने को लेकर वसूले जाने ग्रीन सैस को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के तहत नगर निगम अभी यह तय नहीं कर पा रहा है कि किन भवनों से यह शुल्क वसूला जाना है।
क्या वे भवन मालिक इसके दायरे में आएंगे, जिन्होंने अवैध भवनों के नियमितीकरण को लेकर आवेदन कर रखा है या फिर वे जिन्होंने पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण कर दिया है। एनजीटी के फैसले से पहले पास हुए नक्शे में अवैध निर्माण होने की जो शिकायतें आई हैं, उनसे क्या ग्रीन सैस वसूलना है या फिर रूटीन शुल्क वसूला जाना है। साथ ही यह सैस कब से वसूलना शुरू करना है, इस पर भी असमंजस है। अवैध भवनों के नियमितीकरण का मामला अभी प्रदेश हाईकोर्ट के विचाराधीन भी है। ऐसे में फैसला आने तक नगर निगम कोई कदम नहीं उठा सकता। वहीं, पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण के मामले हैं तो नगर निगम पहले भी इनसे कंपाउंडिंग फीस वसूलता रहा है। ऐसे में यह सैस किन से और कब से वसूलना है, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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चार हजार ने कर रखा है नियमितीकरण को आवेदन
शहर में करीब चार हजार ऐसे भवन हैं, जिन्होंने नियमितीकरण को लेकर आवेदन कर रखा है। इनमें ज्यादातर मर्ज एरिया के मकान हैं, जो हाल ही में निगम में शामिल किए गए हैं। अवैध भवनों का आंकड़ा और बढ़ने के भी आसार हैं। क्योंकि नए वार्डों में दर्जनों मकान ऐसे हैं जिन्हें नियमित करने को लेकर भवन मालिकों ने अभी तक आवेदन नहीं कर रखा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि डेवलपमेंट प्लान बनने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि किन भवन मालिकों से कितना सैस लेना है।
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भवन नियमित करवाने को भरना होगा इतना सैस
एनजीटी के फैसले के मुताबिक अवैध भवन को नियमित करवाने के लिए भवन मालिक को 5 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के अनुसार सैस चुकाना होगा। यह शुल्क उन भवनों पर लागू होगा, जिनका उपयोग भवन मालिक निजी तौर पर कर रहे हैं। कामर्शियल भवनों के लिए यह शुल्क 10 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट रखा गया है। इसके अलावा जिन भवन मालिकों ने पास हुए नक्शे से ज्यादा निर्माण किया है, उसका शुल्क भी वसूला जाएगा। निगम चेक करेगा कि पास हुए नक्शे से बाहर कुल कितना निर्माण हुआ है। भवन मालिकों से यह शुल्क अवैध निर्माण कर पर्यावरण को हुए नुकसान के एवज में वसूला जाएगा।
शहर के विकास पर ही खर्च होगा पैसा
ग्रीन सैस के तौर पर भवन मालिकों से वसूला जाने वाला लाखों रुपया शहर के विकास पर ही खर्च किया जाएगा। एनजीटी के आदेशों के तहत यह साफ किया गया है कि ग्रीन सैस से जो भी वसूली होगी, उसे शहर की मूलभूत समस्याएं दूर करने और विकास संबंधी कार्यों पर खर्चा जाएगा।
क्या कहते हैं आयुक्त
ग्रीन सैस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए विधि अधिकारियों को इसका गहनता से अध्ययन करने को कहा है। डेवलपमेंट प्लान बनने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी कि किन भवन मालिकों से यह सैस वसूला जाना है।
जीसी नेगी, नगर निगम आयुक्त