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नाबालिग से मारपीट कर ताया ने किया रेप, मिली सजा

Sat, 21 Nov 2015 10:31 PM IST
Updated Sat, 21 Nov 2015 10:31 PM IST
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7 years imprisonment in handicap girl rape case.

नाबालिग मंदबुद्धि लड़की के साथ दुराचार करने वाले ताया को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने इसे 7 साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने समेत सहित आईपीसी की धारा 452 के तहत 2 साल का कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। मामला 7 नवंबर 2012 का है। इंदौरा पुलिस थाने में पीड़िता की मां ने ये मामला दर्ज करवाया था।

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पीड़िता की मां ने अपनी शिकायत में कहा बताया था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी के साथ उसके ताया ने दुराचार किया गया। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि जब उसके पति सुबह दिहाड़ी लगाने गए तो करीब 1 बजे उसके देवर ने उसे बताया कि उसकी बेटी के साथ उसके ताया बलदेव उर्फ देव ने दुराचार किया है।
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पीड़िता की मां ने बताया कि जब वह घर पर पहुंची तो उसकी बेटी ने बताया कि उसके ताऊ ने उसके साथ मारपीट की और उसके साथ बलात्कार किया। इसकी सूचना पंचायत प्रधान को दी और पुलिस थाना इंदौरा में इस बाबत मामला दर्ज करवाया।
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बच्ची से दुराचार करने वाले को 10 साल कैद

7 years imprisonment in handicap girl rape case.

वहीं, मंडी में भी बच्‍ची से रेप करने वाले आरोपी को सजा सुनाई गई। यहां पोक्सो कानून के तहत नाबालिग से दुराचार करने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को दस साल के कठोर कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।

अदालत ने पीड़िता के पक्ष में पीड़िता हर्जाना स्कीम के तहत 25 हजार और आरोपी से मिलने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि बतौर हर्जाना अदा करने के भी आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार पीड़िता की माता प्राथमिक पाठशाला में बतौर जलवाहक कार्यरत है। घटना वाले दिन 30 मई 2014 को पीड़िता की माता और भाई स्कूल गए हुए थे। पीड़िता अपने दादी व अंकल-आंटी के साथ घर में थी।

कमरे में बंद कर की थी बच्ची से हैवानियत

7 years imprisonment in handicap girl rape case.

पीड़िता की माता जब स्कूल से लौटी तो उन्होंने देखा कि पीड़िता उल्टे कपड़े पहन कर सो रही है। जब उन्होंने पीड़िता से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि आरोपी ने एक कमरे में ले जाकर उससे दुराचार किया है। हालांकि पीड़िता की दादी ने जब कमरा खोलने के लिए कहा तो आरोपी ने कमरा नहीं खोला और इसे बाद में खोला।

जब आरोपी से कमरा बंद करने के बारे में पूछा गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। ऐसे में पीड़िता के परिजनों ने पुलिस थाना में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी आरके कौशल ने 19 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित किया।

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