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हिमाचल सरकार लापरवाही न बरतती तो बच सकते थे 643 करोड़ रुपये
Sun, 15 Dec 2019 11:56 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 15 Dec 2019 11:56 AM IST
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100 मेगावाट की क्षमता वाली सैंज जल विद्युत परियोजना के निर्माण में अगर सरकार ने लापरवाही नहीं बरती होती तो 643 करोड़ की धनराशि बच सकती थी। विधानसभा में पेश हुई कैग रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 29 महीने की समय वृद्धि होने के चलते 676.29 करोड़ की अनुमानित लागत वाली परियोजना चालू होने तक 1319.33 करोड़ की लागत तक पहुंच गई।
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पावर कारपोरेशन को इस देरी के चलते 272.80 करोड़ का ब्याज भी चुकाना पड़ा। उत्पादन लागत भी 4.40 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ गई। सैंज जल विद्युत परियोजना को मार्च 2015 में शुरू किया जाना प्रस्तावित था। लेकिन सरकार के उपक्रम पावर कारपोरेशन द्वारा ठेकेदार को कार्य स्थल पर पहुंच प्रदान करने में देरी करने, स्थानीय निवासियों द्वारा कार्य बाधित करने, स्थान में परिवर्तन होने सहित अन्य कारणों के चलते इसका निर्माण सितंबर 2017 में पूरा हुआ।
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इस कारण स्वीकृति टैरिफ से कम बिजली की बिक्री भी हुई। कारपोरेशन बिजली की बिक्री से 6.23 रुपये प्रति यूनिट के स्वीकृत टैरिफ के प्रति 4.30 रुपये प्रति यूनिट की औसत से ही राजस्व वसूल कर सकी। इसके परिणामस्वरूप कारपोरेशन को सितंबर 2017 से मार्च 2018 तक के दौरान उत्पादित 145.88 मिलियन यूनिट की बिक्री पर 28.15 करोड़ का घाटा हुआ।
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ठेकेदार को दिया 92 लाख का अतिरिक्त लाभ
सीमेंट, स्टील सहित अन्य वस्तुओं की गलत गणना करने के चलते पावर कारपोरेशन ने एक ठेकेदार को 92.77 लाख रुपये देकर अनुचित लाभ भी पहुंचाया। आधार माह के सूचकांक को नई शृृंखला से परिवर्तित करने के स्थान पर पुरानी श्रृंखला से लेने के चलते यह गड़बड़ी हुई।