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SPU Mandi: एसपीयू के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोजेक्टों के लिए 55 लाख की फंडिंग
Wed, 10 May 2023 12:50 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 10 May 2023 12:50 PM IST
सार
डॉ. लखवीर सिंह ने बताया कि आने वाले दशकों में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया जीवाश्म ईंधन के हरित विकल्प पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सरदार पटेल विवि के रसायन विज्ञान विभाग के दो प्रोफेसरों डॉ. लखवीर सिंह एसोसिएट प्रोफेसर और डॉ. आशीष कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर ने विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) विज्ञान और प्रौद्योगिकी वित्त पोषण एजेंसी विभाग से राज्य विश्वविद्यालय अनुसंधान उत्कृष्टता योजना के तहत अलग-अलग परियोजनाएं हासिल की हैं। उनके इन प्रोजेक्टों के लिए 55 लाख रुपए की फंडिंग मिली है। इसके चलते भविष्य में अब इन परियोजनाओं को विकसित किया जाएगा।
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स्वीकृत परियोजना की चर्चा में डॉ. लखवीर सिंह ने बताया कि आने वाले दशकों में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया जीवाश्म ईंधन के हरित विकल्प पर ध्यान केंद्रित कर रही है। स्वीकृत परियोजना अपशिष्ट जल से हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए पायलट पैमाने के रिएक्टर के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी। कहा कि इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए नई वैकल्पिक प्रक्रियाओं में उद्योगों का ध्यान आकर्षित होगा और उनकी ओर से धन प्रवाह को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
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इसी विभाग के डॉ. आशीष कुमार को मिला एक अन्य प्रोजेक्ट ग्रीन अमोनिया के संश्लेषण से संबंधित है। डॉ. आशीष ने बताया कि जनसंख्या विस्फोट ने विश्वभर में खाद्य सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है. यह भविष्यवाणी की गई है कि आने वाले दशकों में उर्वरकों की मांग में वृद्धि जारी रहेगी, ताकि वैश्विक भूख आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृषि उपज में सुधार किया जा सके। विशेष रूप से, इस उद्देश्य के लिए भारी मात्रा में नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों की आवश्यकता होगी, क्योंकि पौधों की वृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व स्थिर नाइट्रोजन है।
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उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए अमोनिया प्रमुख फीड स्टॉक्स में से एक है। वर्तमान में, अमोनिया का उत्पादन उच्च ऊर्जा इनपुट और कार्बन फुटप्रिंट वाली प्रक्रिया से किया जाता है। यह भविष्यवाणी की गई है कि इस प्रक्रिया से अमोनिया का निरंतर निर्माण 2050 तक सालाना 900 मिलियन टन सीओटू का उत्पादन कर सकता है। यह संभावना है कि निकट भविष्य में अमोनिया की बढ़ती मांग के साथ, ऊर्जा और पर्यावरण पर प्रभाव गंभीर और कम करने में मुश्किल होगा। डॉ. आशीष ने कहा कि अमोनिया के उत्पादन के लिए नए जीवाश्म ईंधन मुक्त वैकल्पिक समाधान विकसित करने का सही समय है।